हस्ताक्षर : मासिक साहित्यिक वेब पत्रिका

अक्टूबर-नवम्बर 2020 (संयुक्तांक)
अंक - 64 | कुल अंक - 64
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

यदि हमारे जीवन से पर्वों को निकाल दिया जाए तो बचेगा क्या?
यदि हमारे जीवन से पर्वों को निकाल दिया जाए तो बचेगा क्या?    दीपावली का पर्व समीप ही है और हर बार की तरह इस बार भी हम कहने लगे हैं कि 'आजकल त्योहारों में पहले-सी रौनक नहीं रही!' स्पष्ट है कि इस बार का ठीकरा, कोरोना विषाणु पर ही फोड़ा जा रहा है। यही होता है कि कोई भी नकारात्मक स्थिति आने पर, हम स्वयं का बचाव करते हुए किसी अन्य को चुन लेते हैं, जिस पर सरलता से दोषारोपण किया जा सके। कोरोना महामारी के अति विकराल रूप धारण कर लेने के बाद भी देश का जो हाल है, वो अब किसी से छुपा नहीं। लॉकडाउन तक एक भय था लेकिन उसके हटते ही यह मान लिया गया कि अब सब सुरक्षित है। इस सोच का परिणाम देश भुगत ही रहा है। सच यही है कि ....

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इस अंक में ......

आवरण: कामरान ख़ान

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