किसी देश की असली तस्वीर उसकी इमारतों से नहीं, उन इमारतों के भीतर सुरक्षित लौट आने की उम्मीद से बनती है। लेकिन हमारे समय का सबसे बेचैन कर देने वाला सच यह है कि अब यह उम्मीद भी धीरे-धीरे धुएँ में बदल...
पिछले दिनों से यह खबर आ रही है कि श्री गंगानगर में एक 13 साल की मासूम लड़की के साथ पांच दिनों के भीतर लगभग 30 से ज्यादा लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया। इस मामले में कुछ आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं और...
श्रीगंगानगर में 18 जून 2026 को एक 13 वर्ष की बच्ची के साथ हुई सामूहिक दरिंदगी की घटना केवल एक अख़बार की सुर्खी नहीं बल्कि हमारे समाज के अंतःकरण पर गहरा आघात है। हर बार ऐसी घटनाओं के बाद सोशल मीडिया...
भारत अब उस मोड़ पर खड़ा है जहाँ जलवायु परिवर्तन कोई भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की कठोर वास्तविकता बन चुका है। मई की शुरुआत में ही देश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार प...
यह लेख किसी मृत्यु की आधिकारिक सूचना नहीं है और न ही किसी व्यक्ति के देहांत की घोषणा। यह लेख उस मानसिकता के विरुद्ध एक आलोचनात्मक हस्तक्षेप है, जिसमें युद्ध को तमाशा और मृत्यु को मनोरंजन में बदल दि...
मुझे ग़ालिब का यह शेर बहुत पसंद है :
वह बादा-ए-शबाना की सरमस्तियाँ कहाँ
उठिए! बस अब कि लज़्ज़त-ए-ख़्वाब-ए-सहर गई
अल्लामा इक़बाल जब ग़ालिब के मज़ार के दर्शन कर रहे थे तो मजार-ए-ग़ालिब पर एक नौज...
कभी-कभी कोई व्यक्ति किसी युग की भाषा बन जाता है। ऐसा नहीं कि वह सिर्फ़ शब्द गढ़ता है, बल्कि वह लोगों के दिलों में वे भावनाएँ जगाता है जो शायद शब्दों से पहले ही मौजूद थीं। जब भारत 90 के दशक की दहलीज...
भारतीय समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करता है। यहाँ स्त्री को “शक्ति”, “माँ” और “देवी” के रूप में प्रतिष्ठित किया जाता है। कैसी विडंबना है कि एक ओर तो हम ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते’ जैसे संस्का...
“ राष्ट्र धर्म के निर्वहन में - ‘ जय हिंद ... जय हिंदी ... जय भारत ... ’ की व्यावहारिक अनुमोदना का शंखनाद - उत्तिष्ठ भारत: मां भारती पुकारती , के आह्वान में - ‘ सात्विक चेतना के दायित्वबोध द्वारा ज...
लंबे समय से हमारे समाज में, विवाह को एक पवित्र बंधन, सभ्यता की आधारशिला, मूल्यों को पोषित करने और अगली पीढ़ी को हस्तांतरित करने की संस्था माना जाता रहा है। शास्त्र इसकी प्रशंसा से भरे हुए हैं, अनुष...




