चिंगारी
न जाने कब रुकेगा, न जाने कब थमेगा
गहन चिंतन करता …
चिंगारी
न जाने कब रुकेगा, न जाने कब थमेगा
गहन चिंतन करता …
कविता जीवन की है धड़कन,
कविता साँसों का है मधुबन।
कविता भीतर …
मौत से पहले भी सम्भव है
यहां तक कि दूसरे जन्म में …
बारिश
पिछले दिनों, जब हो रही थी तेज बारिश
लगा जैसे कोरोना …
कई बार लोग पूछ लेते हैं यह अटपटा सवाल
क्या आपको अच्छा …
सुंदर तो बस काम होते हैं
बैल हांकते हुए
या कंधे पर …
हो रहा निर्माण फिर -फिर
हाथ कला जब सध गए हों
खिल …
जो लिखता…
जो लिखता नाभि से लिखता
भीतर की खदबद को लिखता…
घन घोर घटाओं तुम बरसो
तरु पल्लव तृण-तृण पर बरसो
पीयूष स्रोत …
हरदीप सबरवाल
कविता-कानन
मुकेश कुमार सिन्हा
कविता-कानन
सुरभि बेहेरा
कविता-कानन
दीपाली सुतार
कविता-कानन
बिमल सहगल
कविता-कानन
महेश कुमार केशरी
कविता-कानन
हरदीप सबरवाल
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
ललितप्रसाद जोशी
कविता-कानन
ज़हीर अली सिद्दीक़ी
कविता-कानन
डॉ. आशीष 'अशेष'
कविता-कानन
तेजस पूनियां
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
गौरव चौधरी
कविता-कानन
वंदना सहाय
कविता-कानन
सुशांत सुप्रिय
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
मुकेश कुमार सिन्हा
कविता-कानन
बंदना पंचाल
कविता-कानन
निधि व्यास
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विनीता ए कुमार
कविता-कानन
ममता सिंह
कविता-कानन
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कविता-कानन
पूनम शर्मा
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
बिमल सहगल
कविता-कानन
देवेन्द्र पाल सिह 'बर्गली'
कविता-कानन
बंदना पंचाल
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डाॅ. मधु संधु
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मोती प्रसाद साहू
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प्रभा मुजुमदार
कविता-कानन
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बिमल सहगल
कविता-कानन
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हरदीप सबरवाल
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मुकेश कुमार सिन्हा
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बिमल सहगल
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चंद्रप्रभा शर्मा
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प्रतिभा सुमन शर्मा "रजनीगंधा"
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हरदीप सबरवाल
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