यह जाने का समय है
कार्बी आंगलांग का ऐसा
कोई पत्थर का …
यह जाने का समय है
कार्बी आंगलांग का ऐसा
कोई पत्थर का …
धुँधली पड़ गयीं हैं नज़रें उसकी
मोतियाबिंद से
याद आने लगती
1.
मार्च उदासी के दिनों की पहली सीढ़ी है
लाल-पीले और केसरिया …
रोटी और चाँद
तुम छत पे खड़े
निहार रहे थे चांद को…
वसंत
कुहुकता पूछे पपीहा
कहाँ खिले सरसों के पीले फूल हैं?
बहती …
1.
सुनो,
कुछ गढ़ूं नया?
नवीन विस्तार पाने की एक कोशिश
क्यों? …
नव वर्ष तुम्हारा अभिनंदन
सौरभमयी हो जैसे चंदन
हो सब के मन …
कोहरे से ठंडी रात
बर्फ की चादर ओढ़े
वृक्षों की पत्तियों के …
हरदीप सबरवाल
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मुकेश कुमार सिन्हा
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सुरभि बेहेरा
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दीपाली सुतार
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बिमल सहगल
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महेश कुमार केशरी
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हरदीप सबरवाल
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चंद्रप्रभा शर्मा
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ज़हीर अली सिद्दीक़ी
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डॉ. आशीष 'अशेष'
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तेजस पूनियां
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चंद्रप्रभा शर्मा
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