हमारी संस्कृति में त्योहार इतने योजनाबद्ध तरीके से रचे-बसे हुए हैं कि हम प्रत्येक माह और हर ऋतु में इनका भरपूर आनंद उठा सकते हैं। हरेक उत्सव का अपना एक संदेश, मनाने का विविध तरीका होता है, पर मूल बात यही है कि हर्षोल्लास से परिपूर्ण ये उत्सव मात्र आनंद और मनोरंजन का साधन ही नहीं बल्कि जनमानस में नवजीवन का संचार करने में भी सहायक सिद्ध होते हैं। लोगों को ताज़गी, स्फूर्ति और प्रेरणा मिलती है। जातीयता, प्रांतीयता की कमज़ोर दीवारें स्वत: ही ढह जाती हैं। आपसी वैमनस्य, ईर्ष्या, द्वेष दूर हो उठते हैं और दिलों में सहयोग और भाईचारे की भावना उत्पन्न होती है। राष्ट्रीय त्योहार हमें अन्याय और अत्याचारों से लड़कर देश में न्याय और शांति स्थापना का उत्तम संदेश देते हैं, तो इनमें कहीं त्याग और तपस्या से ज...
प्रीति अज्ञात










