अब जबकि सूख चुकी है धरती
इंसानियत की आँखों में
कहाँ से आएगा पानी?
प्यास से बिलबिलाती नदियाँ
लौटकर वापस आ रही हैं
समंदर के उबाल को
हरामी हवाओं के दस्ते घेरे बैठे हैं
इस फाकाकशी से घायल
दुनिया भर के ग्लेशियर
पिघल रहे हैं धीरे-धीरे
चुल्लू भर पानी में डूबने की
विलुप्त होती आदतों के बीच
हरियाली के नाम पर
छोटे छोटे कस्बों के इर्द-गिर्द
जलाये जा रहे हैं रिहायशी दस्तावेज
घटनाएं अब संगीन नहीं होती
मिसाइल के धमाकों से रंगीन होती हैं
खोखले घमण्ड का विकृत चेहरा
सिखा रहा है सुबकते बच्चों को गद्दार होना
माँ की देह का पसीना चाटते हुए
दुधमुँहे के मुंह से लार का टपकना
कभी दर्ज नहीं होगा इतिहास में
इधर बुद्ध घोषित हो चुका विध्वंस
रासायनिक हमलों से रोक रहा है
मृत तानाशाहों की अराजकता
दीवार से लटकी मकड़ी
कीड़ों की सरज़मीन पर
खुफिया तरीके से बुन रही है जाले
और छत से चिपकी छिपकली
बगावत तथा व्यवस्था के बीच
चकमा देने का विकल्प तलाश रही है
बारूदी गंध से बौखलायी
दोगली मक्खियों का समूह
शान्ति के इन आदिम प्रयासों के बीच
नवजात की सड़ती लाश पर
कर रही हैं गुप्त सभायें
इस कदर चिलचिलाते माहौल में
पेड़ों की कंदराओं से प्यासे कबूतर
झांक रहे हैं आकाश के गिद्धों को
जिन्होंने तफ्शीश के लिए
वहां छोड़ रखे हैं होशियार तिलचट्टे





