बदलाव
बेटा जब पाँच वर्ष का था और माँ घर से बाहर कहीं जाकर वापस आती और बेटे को कहती कि बेटा मैं आ गई तो बेटा माँ का आँचल ज़ोर से पकड़ता और रो-रो कर पूछता “ माँ आप कहाँ चली गई थीं । मेरा मन आपके बिना बिलकुल नहीं लगता है, आप के बिना मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता है।”
बेटा जब बीस वर्ष का हो गया और माँ ने बाहर से आकर बेटे को कहा कि बेटा मैं आ गई तो बेटे ने मुस्कुरा कर पूछा “आप कहाँ गये थे माँ, चलो अच्छा है समय पर आ गए अन्यथा मुझे चिंता हो जाती।”
बेटा जब तीस साल का हुआ और माँ ने बाहर से आकर बेटे से कहा कि बेटा मैं आ गयी तो बेटे ने भावविहीनता से कहा “ तो मैं क्या करूँ?”
बेटा जब चालीस साल का हुआ और माँ ने बाहर से आकर बेटे को कहा कि बेटा मैं आ गई तो बेटे ने रुखेपन से कहा “और आपको ठौर कहाँ है, आना तो यहीं पर है।”
फिर एक दिन माँ वहाँ चली गई जहाँ से यह कहने कभी नहीं आई कि बेटा मैं आ गई।”







