गीत-गंगा
गीत- तो धरती बच जायेगी
खेत नदी खलिहान बचा लो
तो धरती बच जायेगी।
ऊँची एक कतार खड़ी है
कंकरीट के महलों की
जाने कौन बड़ी है कितनी
जिम्मेदारी गमलों की
उन गमलों के प्रान बचा लो
तो धरती बच जायेगी।
हथियारों की होड़ लगी है
लोग बिके हैं पैसे में
जो हैं जिम्मेदार उन्हीं से
यही कहूँगा ऐसे में
होठों की मुस्कान बचा लो
तो धरती बच जायेगी।
हारे फूल सिसकते हों जब
जीत रहे हों बस पत्थर
ऐसे मौसम में क्या करना
ओ भाई! अपने भीतर
एक अदद इंसान बचा लो
तो धरती बच जायेगी।
– ज्ञान प्रकाश आकुल




