मैं और ‘मेरे जैसे’ तुम
मैं यहाँ गहरी नींद में हूँ
ज़माने के मज़मून से दूर
और सुस्त पड़ा मेरा शरीर
मैं और ‘मेरे जैसे’ तुम
जी रहे हैं अलग मुल्क़ों में
सोचते हुए कि एक दिन
धमाकों की आवाज़
संगीत में बदलेगी
और सुकूँ होगा इस ज़मीं पर
हम कभी मिले नहीं पर…
तुम्हें देखा-पढ़ा मैंने खबरों में
सर्द हवाओं के पैग़ाम में
तुम्हें महसूस करते हुए मैंने जाना
यकीनन मेरे जैसे ही हो तुम।
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शहर
थका थका सा ये शहर है
पुरानी सी हो गई है कहानी इसकी
कोई सुनना नहीं चाहता
कोई जानना नहीं चाहता
आग़ाज़ और अंजाम
और सबब इसका
कोई देखना नहीं चाहता
धुंधली तस्वीरें और
कसकती तहरीरें यहां की
यहां तपिश भी है
यहां ख़लिश भी है
बर्बाद चाहतों की कशिश भी है
रात यहां की निगल जाती है
कई रंगीन सहरों को
कहीं बूढ़े चांद को भी न ये निगल जाएं
तारों के बीच अब ये दहशत है
थका थका सा यहां का वक़्त
थका थका यहां का आदमी
थका थका सा ये शहर





