1.
रंगीन दुनिया के रंगीन लोगों में नाम न लिख मेरा
शफ्फाक ही रहने दे मुझे
मेरा चोला रंगेगा रंगरेज़ मेरा
अंदाज झूठे,काले दिल हैं यहाँ धुंआ धुंआ
नकाब नहीं मेरे पास ओढ़ने को,
रहने दो मुझे अनछुआ।
यह जो पर्त-दर-पर्त उदासी भरी
जर्द रंगो की तुमने अपने रूह पर है चढ़ाई,
मेरे बस की बात नहीं,
मेरे बावरे अंतस में तो साँवरिया की
साँवली रंगत है जो छायी।
मिट्टी से बनी मेरी उजली सी कश्ती में
कर्मों की कालिख से भरे सागर को पार
करना ही होगा,
उस पार प्रेम के केसरी, गुलाबी रंग लगाऊँगी खुद पर
और सराबोर करेगा वह मुझे
उन्हीं रंगों से भर भर
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2.
तू रेगिस्तान में रह कर
रेत से भीगने की बात न कर
मृगजल को अंजुरी में भर कर
वास्तविकता पीने की बात न कर
जीवन के उत्तुंग शिखर पर खड़े होकर
संघर्ष की गहराई नापने की बात न कर
स्वार्थ की झोली में ऊष्मा भर कर
निस्वार्थ प्रेम की ऊर्जा बर्बाद करने की बात न कर
पाना चाहता है गर अस्तित्व की संपूर्णता को
तो जूझ अपने अंतर्द्वंद के तूफानों से,
काट मन मस्तिष्क के विचारों के जाल को,
मंद कर हृदय के उबाल को,
न बहका अपने ख्याल को,
बस फिर व्यर्थ स्वप्निल संसार के
किनारे चलने की बात न कर





