हाइकु
हाइकु
सुर्ख चीनार
सघन देवदार
स्वर्ग दीदार
श्वेत वादियाँ
वतन मुकुटिया
झीलें नथिया
घाटी ने ओढा
कंबल कोहरे का
सूरज पोढा
पहाड़ी मेड़
भरे-भरे रहते
चीड़ के पेड़
खेत सेब के
लाल-लाल लहके
बाग चेरी के
मञ्जरी जत्थे
नक्काशीदार पत्ते
रंगीले छत्ते
बर्फ से स्नान
ठिठुरता जहान
फिरन पहान
बारूदगर्दी
संघर्षरत वर्दी
बर्फ बेदर्दी
रूठी बहार
पीठ पर प्रहार
नाहक रार
हुआ कसैला
मेवा अखरोट
जेहादी चोट
फीके जाफरां
लज़ीज़ वाजवान
सूखे बागबां
– प्रतिभा शर्मा




