भोर उदय
धूप कुनमुनाई
बिखरे रंग
दीप सिखाता
अंधेरे से लड़ना
करें संघर्ष
आम बौराए
सुन कर के नाम
मुँह में पानी
मीठा लगता
जो प्रसाद का स्वाद
बड़ा निराला
उड़ारी मारे
समय का जहाज
रूकता नहीं
शीत लहर
थम गया संसार
गाँव शहर
शहर बीच
मिलते नहीं घर
खड़े मीनार





