कविता-कानन
कविता- मैनपाट की सैर कराऊं
आओ प्यारे बच्चो!
छत्तीसगढ़ का यह सरगुजा
घाटी समतल वाला,
क़ुदरत के हैं कई अजूबे
हरा-भरा है सारा।
मेहनतकश हम लोग सभी हैं,
मन के सीधे-सादे।
प्रण अपने के सच्चे पक्के
ऊंचे बड़े इरादे,
नहीं किसी को छलते हम हैं
नहीं धौंस से दादे।
अंबिकापुर में आओ जब भी
मैनपाट सब घूमो,
अज़ब-ग़ज़ब की दुनिया सारी
मिलकर सारे झूमो,
ऊंचे–ऊंचे टीले चढ़कर
भले गगन को चूमो।
टाइगर मछली स्थल यहाँ हैं
मन हर्षाने वाले,
इधर-उधर हैं दौड़े रहते
बदरा घोड़े काले,
बौद्ध मठों की छटा निराली
कुछ नद झरने नाले।
धरती बनी खिलौना कैसे
यह आकर भी देखो,
जलजली में नाचो-कूदो
सब सुख पाकर देखो,
बूढ़े बच्चे भी बन जाते
वह फल खाकर देखो।।
– डॉ. प्रत्यूष गुलेरी




