1
जाने कब निकलेगा सूरज
जीवन के इस घोर अंधेरे
में हूँ खड़ा अकेला
जाने कब निकलेगा सूरज
ले किरणों का मेला
जिन पर भी विश्वास किया मैं
उनसे छला गया हूं
जिनको मैंने अपना जाना
उनको बला लगा हूं
मुँह पर तो सब अच्छा कहते
पीछे करते खेला
जाने कब निकलेगा सूरज
ले किरणों का मेला
जिनसे थीं उम्मीदें मुझको
उनको बोझ लगा हूं
सारे रिश्ते नातों से मैं
अब तो ऊब चुका हूं
था जिनको आशीष ही देना
कहते मुझे झमेला
जाने कब निकलेगा सूरज
ले किरणों का मेला
घर से निकला बाहर जाना
दुनिया माया है
जैसे रेगिस्तान में पानी
एक छलावा है
आगे बढ़ने की ख्वाहिश में
सबने मुझे ढकेला
जाने कब निकलेगा सूरज
ले किरणों का मेला
*****************
2
यादों की सौगात
जाने कैसे दिन थे जाने
कैसी थी वो रात
वे यादें हैं मेरे पूरे
जीवन की सौगात
सुबह सुबह उठ जल्दी
जल्दी जाते थे कॉलेज
जाने कैसा दौर था वो
था उम्र का कैसा फेज
उससे मिलने आतुर रहते
थे मेरे दो नैन
एक झलक ही पाने को ये
रहते थे बेचैन
उससे मिलकर करता था मैं
दिल की सारी बात
जाने कैसे दिन थे जाने
कैसी थी वो रात
घड़ी घड़ी वो फोन घुमाकर
पूछना मेरा हाल
कैसे हो मायूस न होना
रखना अपना खयाल
छोटी छोटी इन बातों से
भर आता था दिल
लगता था कोई पास है मेरे
चेहरा जाता खिल
दिन भर सोचता रहता था फिर
कब हो मुलाकात
जाने कैसे दिन थे जाने
कैसी थी वो रात
उससे बिछड़ा टूट गए सब
मेरे प्यारे सपने
अब मेरा ही साया मुझको
आज लगा है डसने
उसको भूल चुका है ये दिल
ऐसा नहीं कहूंगा
उन यादों की गठरी को मैं
सदा सहेज रखूंगा
उससे ही तो पाए मैंने
चाहत के जज़्बात
जाने कैसे दिन थे जाने
कैसी थी वो रात
वे यादें हैं मेरे पूरे
जीवन की सौगात
जाने कैसे दिन थे जाने
कैसी थी वो रात






