कविता-कानन
फ़र्क
तुम मुझे बर्बर कहते हो
असभ्य कहते हो
तुम्हारी नज़र …
कविता-कानन
फ़र्क
तुम मुझे बर्बर कहते हो
असभ्य कहते हो
तुम्हारी नज़र …
झूठ
भुट्टो तानाशाह नहीं था
तुम्हें कैसे पता चला?
और आतंकवाद का…
कविता-कानन
1.
आओ फिर करें रस्म अदायगी
मनाएँ जश्न
झाड़ें धूल नपे-तुले …
कविता-कानन
शहर के अंदर बसा शहर
शहर के अंदर भी बसता है…
कविता-कानन
अभिमन्यु
सड़क बनाने के लिए
तोड़ दी गयी हैं
उनकी झुग्गी-झोपड़ियाँ…
कविता-कानन
सृजन
अक्सर जब भी पाया है
दिशा हीन खुद को
चूकते …
कविता-कानन
आदमी इश्तिहार नहीं होता
वो महज शब्द नहीं
जिसकी एवज में …
कविता-कानन
विद्रोह
मैंने काले घनघोर मेघों से
कभी रास्तों का पता नहीं …
कविताएँ
जन समस्याएँ
बहुत इच्छा थी
जनसमस्याओं से मिलने की
कल मैं …
कविता-कानन
पचास साल बाद
मैं वहीं हूँ
जहाँ तुम आए थे
चमरौला …
बिमल सहगल
कविता-कानन
महेश कुमार केशरी
कविता-कानन
हरदीप सबरवाल
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
ललितप्रसाद जोशी
कविता-कानन
ज़हीर अली सिद्दीक़ी
कविता-कानन
डॉ. आशीष 'अशेष'
कविता-कानन
तेजस पूनियां
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
गौरव चौधरी
कविता-कानन
वंदना सहाय
कविता-कानन
सुशांत सुप्रिय
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
मुकेश कुमार सिन्हा
कविता-कानन
बंदना पंचाल
कविता-कानन
निधि व्यास
कविता-कानन
विनीता ए कुमार
कविता-कानन
ममता सिंह
कविता-कानन
नवीन कुमार जोशी
कविता-कानन
पूनम शर्मा
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
बिमल सहगल
कविता-कानन
देवेन्द्र पाल सिह 'बर्गली'
कविता-कानन
बंदना पंचाल
कविता-कानन
डाॅ. मधु संधु
कविता-कानन
मोती प्रसाद साहू
कविता-कानन
प्रभा मुजुमदार
कविता-कानन
अटल कश्यप
कविता-कानन
बिमल सहगल
कविता-कानन
महेश कुमार केशरी
कविता-कानन
मालिनी गौतम
कविता-कानन
हरदीप सबरवाल
कविता-कानन
शरद कोकास
कविता-कानन
मुकेश कुमार सिन्हा
कविता-कानन
बिमल सहगल
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
ममता सिंह
कविता-कानन
शैलेन्द्र चौहान
कविता-कानन
धर्मपाल महेन्द्र जैन
कविता-कानन
आनंद शर्मा
कविता-कानन
ममता सिंह
कविता-कानन
प्रतिभा सुमन शर्मा "रजनीगंधा"
कविता-कानन
हरदीप सबरवाल
कविता-कानन
शुभा मिश्रा
कविता-कानन
मुकेश कुमार सिन्हा
कविता-कानन
बिमल सहगल
कविता-कानन
शैलेंद्र ढड्ढा सुधर्मा
कविता-कानन
प्रकाशचंद भट्ट
कविता-कानन
हरदीप सबरवाल
कविता-कानन
सुशांत सुप्रिय
कविता-कानन
