मैं पारस पत्थर हूँ, छू लूँ तो तुम स्वर्ण बनोगे,
मेरे स्पर्श …
शब्दों की अपनी हस्ती है
शब्दों की अपनी मस्ती है
कहीं पर
1. आत्मा के वस्त्र
काश!
कपड़ों से पहले बुने गए होते आचरण …
1. इंस्पेक्टर मातादीन के राज में
( हरिशंकर परसाई को समर्पित )…
आँखों में अश्रु ठहरे हैं
ये ज़ख़्म बहुत ही गहरे हैं
हम
1.
जब बंदूकें बोलती हैं,
तब शब्द चुप हो जाते हैं…
लेकिन …
परिवर्तन
हमने देखा था,पढ़ा था,
सुना था,
चित्रों में, किताबों में,
गीतों …
1) मौन
रात भर की सिसकियों से गीले तकिए
और दुपट्टा मुंह
हरदीप सबरवाल
कविता-कानन
मुकेश कुमार सिन्हा
कविता-कानन
सुरभि बेहेरा
कविता-कानन
दीपाली सुतार
कविता-कानन
बिमल सहगल
कविता-कानन
महेश कुमार केशरी
कविता-कानन
हरदीप सबरवाल
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
ललितप्रसाद जोशी
कविता-कानन
ज़हीर अली सिद्दीक़ी
कविता-कानन
डॉ. आशीष 'अशेष'
कविता-कानन
तेजस पूनियां
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
गौरव चौधरी
कविता-कानन
वंदना सहाय
कविता-कानन
सुशांत सुप्रिय
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
मुकेश कुमार सिन्हा
कविता-कानन
बंदना पंचाल
कविता-कानन
निधि व्यास
कविता-कानन
विनीता ए कुमार
कविता-कानन
ममता सिंह
कविता-कानन
नवीन कुमार जोशी
कविता-कानन
पूनम शर्मा
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
बिमल सहगल
कविता-कानन
देवेन्द्र पाल सिह 'बर्गली'
कविता-कानन
बंदना पंचाल
कविता-कानन
डाॅ. मधु संधु
कविता-कानन
मोती प्रसाद साहू
कविता-कानन
प्रभा मुजुमदार
कविता-कानन
अटल कश्यप
कविता-कानन
बिमल सहगल
कविता-कानन
महेश कुमार केशरी
कविता-कानन
मालिनी गौतम
कविता-कानन
हरदीप सबरवाल
कविता-कानन
शरद कोकास
कविता-कानन
मुकेश कुमार सिन्हा
कविता-कानन
बिमल सहगल
कविता-कानन
चंद्रप्रभा शर्मा
कविता-कानन
ममता सिंह
कविता-कानन
शैलेन्द्र चौहान
कविता-कानन
धर्मपाल महेन्द्र जैन
कविता-कानन
आनंद शर्मा
कविता-कानन
ममता सिंह
कविता-कानन
प्रतिभा सुमन शर्मा "रजनीगंधा"
कविता-कानन
हरदीप सबरवाल
कविता-कानन
शुभा मिश्रा
कविता-कानन
मुकेश कुमार सिन्हा
कविता-कानन
बिमल सहगल
कविता-कानन
