गीत-गंगा
बालगीत- पहले चाय
होरी चाचा
लाये गाय
गाय पिलाती
अपनी बाछी
नाम पड़ा है
सोनागाछी
लाल-दुपट्टा
लाये कीन
कुछ लड्डू भी
कुछ नमकीन
मुसकी काटे
घर की दाय
बाछी कभी न
पीती पानी
बोल रही है
नानी-नानी
कूद-फांद में
रहती मस्त
नहीं हौसला
उसका पस्त
मान रही है
मन की राय
देखी है वह
आता गदहा
तोड़ रही है
अपना पगहा
बोली इसका
क्या है काम
यह पाजी है
नमकहराम
नहीं कमाऊ
कमती आय
हरी घास की
सानी-पानी
सरसों के खल
की अगवानी
सातू का है
कुछ छिड़काव
नमक मिला है
आधा पाव
माँग रही है
पहले चाय
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बालगीत- भिखारीदास
माँ सुलगाती
घर की आँच
छोटे-छोटे
बच्चे तीन
फोकट में ले
आये बीन
खेल रहा है
‘रामू’ काँच
‘गोरख’ गये
बुढ़ाना गेट
बेचे ककड़ी
पाले पेट
टूटी मड़ई
टूटी खाँच
आये आज
‘भिखारीदास’
बंदर लेकर
घर के पास
बच्चे देख
रहे हैं नाच
कुछ बच्चे हैं
हट्टे-कट्टे
पकड़ रहे हैं
कुछ तिलचट्टे
‘हरखू’ आता
पोथी बाँच
आया ‘गोलू’
भालूवाला
पीपल नीचे
डेरा डाला
भालू के हैं
बच्चे पाँच
– शिवानन्द सिंह सहयोगी





