कविता-कानन
कविता- गिनती
गिनती होती बड़ी आसान,
सीखो तुम फिर बनो महान।
एक पतंग बाज़ार से लाया,
दो ने मिलकर इसे उड़ाया।
तीन धागों से डोर बनाया,
चार दिशा में इसे उड़ाया।
पाँच रंगों का है ये प्यारा,
छ: बच्चों ने खेल खेला न्यारा।
सात ने सबसे ऊँचा उड़ाया,
आठ पकड़ कर फिर से लाया।
नौ ने मिलकर ताली बजाई,
दस लेकर आया मिठाई।।
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कविता- खेल
निकला चॉंद, तारे मुस्काए,
सब मिलजुल कर एक खेल रचाए।
आँख मिचौली तारे खेले,
चॉंद कहे कहॉं गए अकेले।
टिम-टिम करते तारे बोले,
अपनी ही मस्ती में डोले।
कभी बादलों में छुप जाए,
कभी चॉंदनी के संग आए।
कितना सुन्दर है यह खेल,
चॉंद तारों का आपस में मेल।
निकला चॉंद, तारे मुस्काए,
सब मिलजुल कर एक खेल रचाए।।
– सागर दत्त




