कविता-कानन
कविता
गुमसुम गुमसुम मोनू आया
माँ से पूछे ऐसे,
मम्मी-मम्मी सारे रिश्ते
बदल गये अब कैसे?
क्यों कहती हैं चाची मुझसे
बेटा अपने घर जाओ,
क्यों कहते हैं रानी, राजू
आइसक्रीम अकेले खाओ।
चाचा आते देख मुझे क्यों
आगे से टल जाते,
और बड़के पापा जल्दी से
घर के आगे से क्यों जाते।
दादी माँ अब क्यों
हरदम रहती रोती,
रात रात भर जागी रहती
घंटे भर न सोती।
क्यों दादा जी सारा दिन ही
खेतों पर हैं रहते,
मुझसे, तुमसे या पापा से
बात नहीं क्यों करते?
दिल्ली वाले मामा जी
राजू के घर क्यों आते,
कपडे़, मिठाई और खिलौने
मुझको नहीं लाते।
मम्मी-मम्मी ये सब क्यों
अब हुए अजनबी जैसे,
मम्मी-मम्मी सारे रिश्ते
बदल गये अब कैसे?
– आशीष पाण्डेय




