ये शब्दकोश से पहले की बात है
गिनती पहाड़े सब बाद में बने
या ये माँ की देन है
तुमने डाला खेत में एक दाना
खेत ने लौटाए तुम्हें दो दाने
और आदमी ने पढ़ा पहली बार
दो- दूनी चार
ये दोनों तब भी उतने ही उर्वर थे
धरती और माँ दोनों ने
लौटाया दो- एकम -दो
दो- दूनी -चार
चार- दूनी -आठ
धरती और माँ दोनों
उर्वरा हैं
दोनों में अंकुरण हैं
दोनों मे प्रस्फुटन है
दोनों में बढ़ना निहित है
दोनों में उत्साह है
धरती और माँ हमेशा दोगुना देते हैं
छींंट दो चना, मकई, गेंहूँ का दाना
भर देतीं हैं बखार
बोरी -बोरी अनाज से
धरती की तरह माँ भी लौटाती है दोगुना
नहीं उसके पास कोई ब्याज का हिसाब नहीं है
नहीं है कोई खाता- बही
पुरूषों की तरह नहीं जानतीं
वे जोड़- घटाव
गुणा- भाग
उनको लौटाना है,
दिए जाने वाले भाग से
हमेशा कई -कई गुणा
वो सर्जना हैं, अन्नपूर्णा हैं
दोनों में दो -दूनी चार की तरह
लौटाने का हुनर है
ये महज इत्तेफाक नहीं है कि
शब्दकोश में दोनों स्त्रीलिंग हैं
दोनों लौटातीं हैं दो दूनी चार







