इस वर्ष कोरोना के क़हर से जूझती दुनिया को एक लंबी प्रतीक्षा के बाद जब टीके लगने प्रारंभ हुए तो जैसे सबने चैन की साँस ली। यूँ लगा कि चलो, अब खतरे से बचा जा सकता है। कम-से-कम घातक परिणाम की आशंका तो नहीं ही रहेगी अब। यद्यपि अभी भी एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो टीकाकरण के विरुद्ध है और ऐसे नागरिकों की भी संख्या कम नहीं जिन्हें दोनों डोज़ नहीं मिल सके हैं। बच्चों का नंबर तो अभी आया ही नहीं। लेकिन फिर भी जिनका पूर्ण टीकाकरण हो गया और उसका प्रमाणपत्र भी उन्हें मिल गया, वे कुछ ज्यादा ही निश्चिंत हो गए। कहना गलत न होगा कि जीवन अब सामान्य होने की दिशा में चल पड़ा था। लेकिन 'ओमिक्रॉन' की आहट ने यह बता दिया कि हमें अपनी सुरक्षा और सावधानी में अब भी कोई कमी नहीं रखनी है।
जैसा कि आप जानते हैं कि दक्षिण अफ्रीक...
प्रीति अज्ञात










