हायकु
हायकु
पीपल आस
लौट आएँगे पाखी
गए प्रवास
नभ पटल
रवि की चित्रकारी
सुबह शाम
नभ सागर
मेघों की ये सीपियाँ
बिखेरे मोती
तृषित धरा
जल भर ले आये
मेघ मशक
रवि मिलन
साँझ है उतावली
फैला आलता
आया सावन
रोमांचित है धरा
हरित दूब
मेघ दुंदुभि
लय ताल के संग
झूमती बूँदें
बूँदें कहती
बुलबुला जीवन
क्षणिक ख़ुशी
खोले बटुआ
मेघ वारे धरा पे
रजत मोती
गगन मंच
बहुरूपिये मेघ
मन हर्षाते
पुष्प बगीचा
रंग भरे नमूने
धरा गलीचा
बूँदों का स्पर्श
महक उठी धरा
अंकुर उगे
– ज्योतिर्मयी पन्त




