हायकु
हाइकु
बची कहानी
एक था आसमान
रहा न पानी
जैसी कलम
वृक्ष उगता वैसा
बाप-सा बेटा
अपनापन
अपनों में खोजना
रेत में सुई
पूछता हाल
खत्म हर मलाल
इंसानियत
माटी में बीज
जीवन गाता गीत
पेड़ की छाँव
गज्जब कारा
ध्रुमपान विकार
मृत्यु के द्वार
बन जाता है
निर्धन का भोजन
रोटी-सा चाँद
गर्भ में बेटी
नदी में मरे मीन
हा..दीन-हीन
बालक सूर्य
रश्मि रथ सवार
प्रकाश सार
सावन भादो
विरह खोले केश
नैन बरसे
– निवेदिता श्रीवास्तव




