कविता-कानन
जब जाते हैं नेताजी
जब जाते हैं नेताजी
बापू की समाधि पर
चढ़ाने श्रद्धाभाव से फूल
तो स्वर्ग में
बैठे बापू को
दुख होता होगा
उन लाल-लाल
तने चेहरों
तनी छाती
तनी तोंद को देखकर
लाखों बार धन्यवाद देते होंगे
अपनी मौत को
नहीं तो यह सब देख
जीते जी मर जाते शर्म से
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सिल बट्टा
गरीब की छाती
वह सिल है
जिस पर उसके
खून
पसीने
माँस
मज्जा
सुख
दुख
को पीस-पीस कर
अभिजात लोग
चटनी बनाकर
मज़े से खाते हैं।
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सेल
सेल लगी है
धमाकेदार सेल लगी है
सुई से जहाज तक
चींटी से सरकार तक
सबकी सेल लगी है
जिसे चाहे
खरीद लो
जितना चाहे
खरीद लो
सब बिकाऊ हैं
रोटी-कपड़ा-मकान
खेत-खलिहान
चारा,कोयला, स्टाम्प पेपर
वोट,दवाई,डिग्री
स्कूल काॅलेजों की सीट
डाॅक्टर, इंजीनियर, नेता, पुलिस की भीड़
जो नहीं बिकना चाहेगा
उसका इलाज कराया जाएगा
चिंता मत करो
कोई नहीं पकड़ा जाएगा।
– मनीषा




