एक कप गरम चाय की चुसकियों के साथ सुबह खुद को तरोताजा कर अखबार की तलाश में निकल पड़ता हूं। रोजाना देरी से आने वाली डिलीवरी के कारण विकसित स्टैन्डर्ड प्रोटोकॉल के अनुसार, मैं बाउंड्री वॉल को गले लगाए खड़े बोगनविलिया बेल के पत्तों के घने झुंड और उसकी शाखाओं की उलझनों को स्कैन करता हूं; गमलों में लगे पौधों के फैलाव के बीच में खोज करता हूं; कार के नीचे झुक कर झाँकता हूँ और फिर मेरी बाज जैसी आंखें जमीन से उड़ बाउंड्री वॉल के ऊपर जा कुछ देर वहीं बैठ इत्मीनान से वहाँ का मुआयना कर निराश लौट आती हैं।
इतवार की सुबह आठ बजे के करीब है और अखबार का अभी तक कोई पता नहीं। इस बीच, गैरेज की छत पर बालकनी से हताश झांकियों ने पहले ही इस बात की उच्च संभावना को खारिज कर दिया है कि अखबार आज फिर से वहीं परोसा हो सकता है और ऐसी गंभीर वास्तविकता में वहां लंगड़ा हुआ पड़ा पहले से आधा दर्जन अपने पूर्वजों के सड़ते शवों को श्रद्धांजलि दे रहा होगा। मेरे अख़बार वाले गिरधारी की निपुणता और बैलिस्टिक मिसाईल दागने की क्षमता के कारण अखबार का हथगोला किसी भी दिशा से आकर फट सकता है और अपने रास्ते में आई किसी भी रुकावट के परखच्चे उड़ा सकता है।
निराश होकर मैं अंदर आता हूँ। न्यूज़ के लिए तरसते हुए मैं टी वी चालू करता हूँ और नई घटनाओं की कुछ झलक पाने के लिए न्यूज़ चैनलों को पलटता हूँ। यह देखने का मेरा दूसरा प्रयास है कि क्या उन्होंने दुकान खोल ली है और अब पिछली रात के कार्यक्रमों के बासी दोहराए गए प्रसारण और रिकॉर्ड की गई खबरों को दिखाना बंद कर चुके हैं । मेरी उम्मीद अभी भी जीवित है क्योंकि मैं चैनलों के बीस मिनट के सामूहिक विज्ञापन ब्रेक से उनके लौटने का इंतज़ार कर रहा हूँ। मुझे पता है कि किसी अन्य चैनल के साथ अपनी किस्मत आजमाना मेरे लिए बेवकूफी होगी क्योंकि उन्होंने समझदारी दिखाते हुए आपके बच निकलने के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं। अरे हाँ, वे वापस आ गए हैं लेकिन यह तो भाग्य चक्र और सितारे क्या बताते हैं जैसे कार्यकर्मों का समय है। चूंकि सभी न्यूज़ चैनल आपके बारे में चिंतित हैं कि आपका दिन अच्छा गुजरेगा या नहीं, आज क्या खाएँ क्या न खाएँ, क्या पहनें, बॉस के सामने किस वक़्त न जाएँ और बीवी से आज कौन सी बात न करें, उन्होंने निश्चय कर लिया है वे आपको इस बारे में खबरदार कर दें। आपको उनकी बात माननी है या फिर टी वी बंद कर किसी अपशकुन को न्योता देना है वो आपकी मर्जी। ठीक है, मैं नाश्ता करके आता हूं। मुझे बगीचे और आंगन का एक और जायजा लेने भी जाना है। हो सकता है गिरधारी आया हो। लेकिन मुझे बाहर किसी धमाके के आवाज तो सुनाई नहीं दी थी।
मैं वापस आ गया हूं। चलो देखता हूं अब उनके पास क्या है। मैं किसी हिंदी न्यूज़ चैनल पर ‘फटाफट 50’ न्यूज़-पैक ढूंढ रहा हूं, जहां वे सिर्फ पांच मिनट में पूरे पचास समाचार देने का वादा करते हैं। मैं विशेष रूप से उनके उस अंदाज का कायल हूं जिस तरह से वे गिनती के बीच के अंतर को चिह्नित करने वाले ढोल की तेज आवाज के साथ क्रमिक रूप से उन संख्याओं को आगे बढ़ाते हैं, उदाहरण के लिए: 1. नाबालिग लड़की के साथ छेड़-छाड़; 2. लापतागंज में हुई छेड़-छाड़; 3. चार थे छेड़-छाड़ करने वाले; 4. लड़की ने मचा दिया शोर; 5. चारों गए भाग। अरे, धत तेरे की! फिर से यह लंबा विज्ञापन ब्रेक आ गया। चलो, तब तक दूसरे मनोरंजन और पारिवारिक चैनलों पर कुछ दिलचस्प देख लेता हूँ। ओह, नहीं! मैं कैसे भूल गया कि समकालिक रूप से आयोजित विज्ञापन ब्रेक, बेईमान और विश्वासघाती दर्शकों के खतरे से निपटने के लिए उनका संयुक्त उपक्रम है! बीच-बीच भरोसा दिला रहे हैं कि वे जल्द ही व्यवसाय क्षेत्र के स्वास्थ्य और कल्याण पर विचार-विमर्श करने के लिए वापस आएंगे।
मैं टी वी गाइड देखता हूं। अगले कार्यक्रम व्यक्तिगत स्वास्थ्य, फैशन, यात्रा और पर्यटन, फिर खेल, वाइरल क्या है, उसके बाद अपराध और अपराधियों पर हैं। सभी चैनलों पर ये कार्यक्रम एक ही क्रम में और एक ही समय पर दिखाए जाते हैं ताकि मेरे जैसा कोई भी विश्वासघाती दर्शक अपना ध्यान अन्य सांसारिक मुद्दों पर न लगा सके जबकि देश भर में अपराध-विज्ञान के सिद्धांतों जैसे गंभीर मामलों पर चर्चा हो रही हो। बेचारे न्यूज़ चैनलों के बारे में सोचिए; किसी सेलिब्रिटी का साक्षात्कार या किसी भी कार्यक्रम रिकॉर्ड करने के लिए वे कितने प्रयास और संसाधन लगाते हैं। उन्हें लागत वसूलने के लिए इसे पूरे दिन, कई हफ्तों तक बार-बार चलाने का अधिकार तो बनता है। ऐसे में जब वे लगातार बलात्कार-विशेष या अन्य कामुक सामाजिक घोटाले चलाते हैं, तो उन्हें दोष क्यों दिया जाए, उन्हें पूरा व्यापारिक हक है कि वे अपने लक्षित रेटिंग पॉइंट्स के तराजू को अपनी तरफ झुका सकें। और इसी तरह हमें समझना पड़ेगा कि इन्हीं व्यापारिक कारणों के लिए उनमें से प्रत्येक चैनल खुद को सर्वश्रेष्ठ के रूप में वर्गीकृत करता है और अपने आप को ही नंबर एक स्थान प्रदान कर लेता है। अब यह निराशावाद की पराकाष्ठा ही होगी अगर आप पूछें कि नंबर दो और तीन वाले कौन हैं।
अब यह बहुत हो गया खबरनामे का रोना-धोना। मुझे घर और परिवार के प्रति अपने वीकएंड के दायित्वों को पूरा करने दें। मुझे काम से बाहर जाना है, शाम को वापस आऊंगा जब सभी न्यूज चैनल राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर बहस करने के लिए एक साथ बैठेंगे, जैसे कि किस राजनेता ने दिन के दौरान दूसरों के बारे में क्या कहा या किसी ऐसे ही लोकप्रिय हित के मुद्दे पर किसकी जुबान कैसे फिसली। प्रतिष्ठित पैनलिस्ट उस कथन की वंशावली का विश्लेषण करेंगे और मेजबान खुद एक गुट के लिए पिचिंग करने वाले बैंडवागन में शामिल हो जाएगा और असहमत विचारों वाले लोगों को अनदेखा कर या चिल्लाकर चुप करा देगा, जैसे कि कोई दबंग दरोगा अपने थाने में लाए गए आरोपी को पीट-पीट कर उससे पहले से लिखे कबूलनामें पर साइन करवाता है। फिर से ई-टाइम होगा, उसके बाद बार-बार दोहराए जाने वाले कार्यक्रमों और टेलीशॉपिंग सेशन्स का पुनः प्रसारण होगा, जिसमें लगातार ‘ब्रेकिंग न्यूज’ के टिकर चलेंगे, जो आपकी यादाश्त का पिछले तीन दिनों में हुई घटनाओं के बारे में इम्तिहान लेंगे।
चलो, तब तक किसी नई खबर की तलब में मैं एक बार फिर से अपने लापता अखबार की तलाश में बाहर होकर आता हूँ।







