राजस्थान की माटी और श्रीगंगानगर के एक साधारण श्रमिक परिवार के तेजस पूनियां ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मेधा का परचम लहराया है। कोलकाता स्थित ‘अजहर आलम मेमोरियल ट्रस्ट’ द्वारा आयोजित तीसरी राष्ट्रीय शोधपत्र लेखन प्रतियोगिता में तेजस ने देशभर के सैकड़ों शोधार्थियों को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। 17 अप्रैल को कोलकाता में आयोजित भव्य राष्ट्रीय सेमिनार में उन्हें 5 हजार रुपये की नकद राशि और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। उनकी इस उपलब्धि पर उनके शोध संस्थान में हर्ष का माहौल है।
शोधपत्र प्रतियोगिता का मुख्य विषय “जयशंकर प्रसाद से लेकर अब तक हिंदी नाटकों में स्त्री” रखा गया था। चयनित शोध आलेखों को रंगमंच की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘रंग-रस’ में भी स्थान दिया गया है। तेजस ने अपने शोध लेख में प्रसादकालीन नारी पात्रों से लेकर समकालीन रंगमंच तक महिलाओं की बदलती भूमिका और उनके संघर्षों का गहरा विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस लेख में उनके लेखन की मौलिक दृष्टि के कारण निर्णायक मंडल ने उनके शोध को देशभर में सर्वश्रेष्ठ चुना। सम्मान ग्रहण करते हुए मंच से तेजस पूनियां ने कहा, “मुझे यह तो मालूम था कि मेरा शोधपत्र सम्मानित होगा, लेकिन मुझे यह यकीन नहीं था कि मुझे पूरे भारत में प्रथम स्थान प्राप्त होगा।” उन्होंने इस सम्मान के लिए ज्यूरी मेंबर्स का आभार व्यक्त किया।
संघर्षों की उपज है यह उपलब्धि – तेजस पूनियां का जन्म श्रीगंगानगर (राजस्थान) के एक श्रमिक परिवार में हुआ। अभावों के बीच शिक्षा प्राप्त करते हुए उन्होंने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती। वर्तमान में वे जनता शिक्षण मंडल (जे.एस.एम.) महाविद्यालय, अलीबाग (रायगढ़) से प्रो. मोहसिन खान के निर्देशन में पीएचडी कर रहे हैं। उनके शोध का विषय ‘हिंदी लघु नाटक: परिदृश्य, सरोकार एवं रंगशिल्प (सन् 2001 से 2022)’ है।
दिग्गज साहित्यकारों ने दी बधाई – तेजस की इस उपलब्धि पर साहित्य और कला जगत की जानी-मानी हस्तियों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त नाटककार प्रताप सहगल, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. रक्षा गीता और गुजरात साहित्य अकादमी की दो बार की विजेता प्रीति अज्ञात ने उनकी उपलब्धि की सराहना की है। इसके साथ ही जनता शिक्षण मंडल, अलीबाग रायगढ़ के अध्यक्ष माननीय गौतम पाटील, जे.एस.एम. महाविद्यालय अलीबाग-रायगढ़ की प्राचार्य प्रो. सोनाली पाटील और शोध निर्देशक प्रो. मोहसिन खान ने उन्हें इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर बधाई देते हुए इसे महाविद्यालय के लिए गर्व का क्षण बताया है।
इस मौके पर तेजस पूनियां ने अपनी सफलता का श्रेय अपने स्वर्गीय पिता श्री रघुनाथ पूनियां के कठिन परिश्रम और अपने गुरुओं के मार्गदर्शन को दिया है। वे भविष्य में हिंदी रंगमंच और लघु नाटकों के क्षेत्र में अकादमिक स्तर पर और अधिक शोध कार्य करना चाहते हैं, ताकि हिंदी साहित्य की सेवा की जा सके। साथ ही वे एक कहानी संग्रह तथा सिनेमा पर तीन किताबें भी लिख चुके हैं।
तेजस का कहना है, “यह केवल मेरी जीत नहीं, बल्कि मेरे मार्गदर्शकों और हिंदी रंगमंच के प्रति मेरी निष्ठा का परिणाम है। राष्ट्रीय मंच पर अपने संस्थान का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए गर्व की बात है।”







