1-
सच कहना है अब बुरा, कहे यहाॅं सच कौन।
सच के दुश्मन हैं सभी, अच्छा है जो मौन।।
2-
भूल गया है मौत को, लालच से मजबूर।
तन्हा जाना क़ब्र में, फिर भी करे ग़ुरुर।।
3-
मेरी क्या पहचान है, ढूँढ रहा मैं कौन।
दिखता जो वो मैं नहीं, अंदर कुछ है मौन।।
4-
फ़ितरत है इंसान की, सबके अलग विचार।
कुछ तो सच को सच कहें, कुछ करते इनकार
5-
जीते जी का साथ है, मरने पर है भार।
चले सभी इस पार तक, चले नहीं उस पार।।
6-
साक़ी ऐसी मत पीला, चढ़कर उतरे यार।
एक बार ऐसी पिला, भव-सागर हो पार।।
7-
कुछ दिन का बस खेल है, मौत हँसे इक ओर।
बचना मुश्किल मौत से, लाख लगा ले जोर।।
8-
कीड़े खाऍं क़ब्र में, जब तक रहे शरीर।
सोच वहाॅं तकलीफ़ में, कैसी होगी पीर।।
9-
जिसके दिल में प्यार है, सही वही इंसान।
पत्थर दिल कुछ नफ़रती, घूम रहे शैतान।।
10-
मांस जला हड्डी बची, राख बची शमशान।
भूल गए अपने सभी, कर्म बची पहचान।।
11-
उतरी उम्र ढलान पर, रहा अधूरा ज्ञान।
अंत नहीं है मौत से, आगे का कर ध्यान।।





