ओंकार सहाय श्रीवास्तव द्वारा स्थापित ‘दि इंडियन बुक डिपो, लखनऊ (सन् 1931)’ की व्यवस्था देखते हुए साहित्य में रुचि जागृत हुई।
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं जैसे ‘उत्तर प्रदेश’, ‘साहित्य भारती’, ‘बाल वाणी’, ‘गवेषणा’, ‘हिंदुस्तानी’, ‘विश्व भारती’, ‘पुस्तकालय भारती’, ‘राष्ट्र धर्म’, ‘पूर्वापर’ तथा ‘मड़ई’ में लेखन का अव
ओंकार सहाय श्रीवास्तव द्वारा स्थापित ‘दि इंडियन बुक डिपो, लखनऊ (सन् 1931)’ की व्यवस्था देखते हुए साहित्य में रुचि जागृत हुई।
विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं जैसे ‘उत्तर प्रदेश’, ‘साहित्य भारती’, ‘बाल वाणी’, ‘गवेषणा’, ‘हिंदुस्तानी’, ‘विश्व भारती’, ‘पुस्तकालय भारती’, ‘राष्ट्र धर्म’, ‘पूर्वापर’ तथा ‘मड़ई’ में लेखन का अवसर प्राप्त हुआ।
लखनऊ के ‘प्रसार भारती’ के ‘अक्षय वट’ से समय-समय पर प्रसारण होता रहा।
हिंदी कथा साहित्य में ‘वृद्ध विमर्श: दशा और दिशा’ (मनीष सुथार की पुस्तक) में मेरे लेख ‘ढलती संध्या के मुसाफ़िर’ को स्थान प्राप्त हुआ है।
लखनऊ से प्रकाशित योगेश ‘प्रवीण’ जी की पत्रिका ‘लखनऊ महोत्सव’ के दो अंकों में ‘उर्मिला’ और ‘लक्ष्मण’ पर मेरे लेख प्रकाशित हुए।
उत्तर प्रदेश सूचना विभाग की पत्रिका ‘संदेश’ में ‘कबीर के राम’ नामक लेख प्रकाशित हुआ।
चित्र लेखा वर्मा
दि इण्डियन बुक डिपो
आदित्य भवन प्रथम तल
बी, एन, वर्मा रोड
झन्डा वाला पार्क
अमीनाबाद
लखनऊ 18