जुलाई 2018 ग़ज़ल-ग़ज़ल-गाँव ग़ज़ल- ज़ख़्मे-दिल के लिए तदबीर ज़रा अच्छी हो तब कहीं जाके … ग़ज़ल-गाँव आशकारा ख़ानम कश्फ़