ग़ज़ल-गाँव
ग़ज़ल-
छोड दी अब हयात फूलों की
हमसे होगी न बात फूलों की
मेरे आँगन में चाँद उतरा है
आ गई फिर से रात फूलों की
ख़ार देते रहे हमेशा जो
कर रहे हैं वो बात फूलों की
हमको काँटे ही रास आते हैं
कब सुनी हमने बात फूलों की
रंग सारे उतर गये दिल में
आई फिर से जमात फूलों की
हमने दामन में भर लिया इनको
हमसे होगी न मात फूलों की
ख़ार के साथ-साथ चलते हैं
जान ली हमने ज़ात फूलों की
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ग़ज़ल-
ये ज़मीं आसमान रहने दो
सर मेरे सायबान रहने दो
कौन जीता है कौन मरता है
आप ख़ाली बयान रहने दो
ज़िन्दगी के उदास रस्ते में
प्यार का कुछ गुमान रहने दो
हम भी हँसकर गुज़ार लें इसको
मेरे हिस्से की जान रहने दो
बेटियों से ही घर में रौनक है
ख़ुशबुओं का मकान रहने दो
आज तो हम सुनायेंगे ग़ज़लें
आप अपना बयान रहने दो
ये तो बस्ती है सिर्फ सच्चों की
अब ‘मधु’ की ज़ुबान रहने दो
– मधु गुप्ता




