हायकु
1.
बसंत बेला
उठी छोड़ आलस
ठिठुरी घास
2.
मन दरिया
यादों की मछलियाँ
डूबें, निकलें
3.
पत्तों ने ओस
नैनों ने मोती खोये
हुआ सवेरा
4.
साँसों के तार
अंतर्मन ने सुनी
प्रीत-झंकार
5.
मिट्टी के रंग
सिखलाते हमको
जीने के ढंग
6.
टिमटिमाते
धरा पर जुगनू
नभ पे तारे
7.
मन -कमल
परतें हैं हजार
भीतर खाली
8.
फूली सरसों
बिछी है धरा पर
पीली चुनरी
9.
गेंदे की क्यारी
बसंत की पगड़ी
खुली, बिखरी
10.
प्रीत के फूल
चाहे थे हमने भी
मिले हैं शूल
11.
हल्दी -कुंकुम
रँगे हैं हम -तुम
रँगा जीवन
12.
गठबंधन
मन का समर्पण
नेह -अर्पण
13.
तारक-पुष्प
गगन में छितरे
महकी धरा
14.
आया वसंत
बाँधे है पीली पाग
अहा! सुहाग
15.
गड़ा है काँटा
समय के पाँव में
सँभले कैसे?
– अनिता मण्डा




