1. भाई की परवाह
सात साल बाद अमेरिका से आई दीदी से मिलने भाई शिरीष अहमदाबाद गुजरात से ‘हावड़ा एक्सप्रेस’ ट्रेन से कोलकाता पहुँचा। बड़े भाई सतीश के घर ठहरी दीदी ने दरवाजा खोला और कुछ देर बाद अपनी भाभी को अहमदाबाद फोन लगाया।
जैसे ही भाभी नीरजा ने फ़ोन पर ‘हैलो’ कहा, दीदी ऊँची आवाज़ में बोलने लगीं, ‘ नीरजा, तुम्हें मेरे भाई की ज़रा भी परवाह नहीं है। उसे ट्रेन से क्यों भेजा? उसका चेहरा बहुत थका हुआ लग रहा है! इस उम्र में तुम्हें उसे एरोप्लेन से भेजना चाहिए था। इतने बड़ी पोस्ट पर काम करती हो और मेरे भाई के लिए इतना नहीं कर पाई?’
नीरजा को दीदी का फोन कटने की आवाज़ सुनाई दी।
2. आईना
कल ही प्रणीति के देवर का विवाह हुआ। आज रिसेप्शन पार्टी है। ससुराल में खुशी का माहौल है। कई मेहमान आने वाले हैं। परिवार की सभी महिलाएँ अपने-अपने तरीके से तैयार होने में व्यस्त हैं। प्रणीति भी एक शयनकक्ष में लगे आईने के सामने खड़े होकर अपने चेहरे पर मेकअप लगा रही है।
उसका सिंगार अपने अंतिम चरण में था तभी अचानक एक आवाज़ ने उसके विचारों की शृंखला तोड़ दी। परिवार की एक ख़ूबसूरत महिला तीखी आवाज़ में कह रही थी, ‘प्रणीति, मैं देख रही हूँ कि तुम बहुत देर से आईना रोक कर खड़ी हो। अब एक तरफ हो जाओ, वैसे भी इतना सजने-संवरने से तुम्हें क्या फर्क पड़ेगा?’
3. गिनती
नीलिमा जी किचन में गईं और अपनी खाना बनाने वाली लड़की पर बहुत ज़ोर से चिल्लाने लगी। उसका गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी ध्यान नहीं था कि घर में मेहमान आए हुए हैं। जैसे ही वे लिविंग रूम में दाखिल हुईं, मेहमान महिला ने पूछा, ‘प्रॉब्लम क्या है, दीदी?’
‘ओह!’ मेहमान महिला बोलीं।
थोड़ी देर रुकने के बाद, मेहमान महिला ने धीमी आवाज़ में पूछा, ‘ऐसा तो होना नहीं चाहिए कि यह गरीब, बेसहारा लड़की, जिसे पैसों की सख्त ज़रूरत है, आपकी बात न सुने। क्या वह पढ़ी-लिखी है?”
‘नहीं, उसे अक्षरज्ञान भी नहीं है।’ नीलिमा जी झल्लाते हुए बोलीं।





