पिछले दिनों 9 से 12 नवंबर 2025 के दौरान ‘फाउंडेशन ऑफ सार्क राइटर्स एंड लिटरेचर’ द्वारा 66वां सार्क लिटरेचर फेस्टिवल दिल्ली के ऐतिहासिक सीरी फोर्ट क्षेत्र में स्थित ‘अकैडमी ऑफ फाइन आर्ट्स एण्ड लिटरेचर’ के भवन में आयोजित किया गया। साहित्य अकादमी फेलो, वरिष्ठ पंजाबी साहित्यकार पद्मश्री अजीत कौर द्वारा स्थापित और संचालित, ‘फाउंडेशन ऑफ सार्क राइटर्स एंड लिटरेचर’ (फ़ोसवाल) एकल व प्रथम साहित्यिक संस्था है जो सार्क संगठन के भारत समेत आठ देशों- श्री लंका, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, मालदीव्, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के नागरिकों के बीच साहित्यिक और सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए 1986 से भारतीय पब्लिक डिप्लोमेसी के ट्रैक II के अंतर्गत कार्यरत रही है। हालांकि सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम को सार्क के चार्टर में अप्रैल 2000 में काठमांडू में आयोजित सार्क समिट के समय सम्मिलित किया गया और यूं प्रथम सार्क राइटर्स कॉन्फ्रेंस का आयोजन भी तब हुआ, पाकिस्तान के लेखकों ने विभाजन के बाद भारतीय भूमि पर 1987 में कदम रखा और फिर भारतीय लेखक भी ‘फ़ोसवाल कारवां’ के अंतर्गत पहली बार पाकिस्तान 2002 में गए। पाकिस्तान के लेखक इन कार्यक्रमों में अंतिम बार 2016 में सम्मिलित हुए और फिर आपसी रिश्तों के बिगड़ने से दोनों देशों में किसी भी प्रकार के साहित्यिक या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी संभव नहीं हो पाई है।
इस साहित्यिक उत्सव में नेपाल, मालदीव्, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका से आए और भारत से जुड़े लगभग 150 साहित्य क्षेत्र से संबंधित वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अंग्रेजी भाषा के एक कवि के रूप में इस लेखक को भी इसमें भाग लेने और अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस प्रस्तुति के दौरान वरिष्ठ पंजाबी लेखिका अजीत कौर और उनकी अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुत्री अर्पना कौर तो थीं ही, सौभाग्य से महात्मा गांधी की पौत्री, वरिष्ठ कवयित्री व समाज सेविका तारा गांधी भट्टाचार्य भी आईं। अजीत कौर की हमउम्र और मित्र, तारा पिछले दो महीनों से अस्पताल में थी और इस कार्यक्रम में भाग लेने पहली बार घर से बाहर निकली थीं। उन्होंने वहाँ अपनी दो कविताएं भी पढ़ी जिनमें से एक बा यानि कस्तूरबा गांधी की स्मृति में थी।
कार्यक्रम का उद्घाटन फ़ोसवाल की अध्यक्षा, अजीत कौर के स्वागत भाषण से हुआ जहां मुख्य अतिथि थे साहित्य अकादमी के अध्यक्ष, डॉ माधव कौशिक। प्रतिनिधियों को उनके सम्बोधन के पश्चात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रख्यात साहित्यकार, आशीष नंदी ने उद्घाटन समारोह का मुख्य व्याख्यान दिया। कार्यक्रम के दूसरे सम्मानीय अतिथि थे श्री लंका की उच्चायुक्त, महामहिम (सुश्री) महिशीनी कोलोन; नेपाल के राजदूत, महामहिम डॉ शंकर प्रसाद शर्मा; बांग्लादेश के उच्चायुक्त, महामहिम एम रिआज़ हमिदुल्लाह; मालदीव की उच्चायुक्त, महामहिम (सुश्री) ऐशथ अज़ीमा और साहित्य अकादमी के सचिव, डॉ के एस राओ। प्रो अभि सूबेदी (नेपाल), प्रो आशीष नंदी (भारत) और डॉ माधव कौशिक (भारत) को आजीवन उपलब्धि पुरस्कार से सम्मानित किया गया और अनुरासीरी हेटटीगे (श्रीलंका); फरीदुर रहमान (बांग्लादेश); इब्राहीम वहीद (मालदीव); कामरूल हसन (बांग्लादेश); (सुश्री) लक्ष्मी मल्ल (नेपाल) और डॉ रामकृष्ण पेरुगू (भारत) को सार्क साहित्य पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। स्मरणीय हो कि इस पुरस्कार की ट्रॉफी को विश्व स्तर पर ख्याति-प्राप्त मूर्तिकार राम सुतार ने डिजाइन किया था। साहित्य उत्सव में भाग लेने वाले कुछ लेखकों की नई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया और उसके बाद साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता व साहित्य अकादमी फ़ेलो अजीत कौर पर साहित्य अकादमी द्वारा बनाई गई फिल्म दिखाई गई।
चार दिनों के कार्यक्रम को प्रतिदिन आठ सत्रों में बांटा गया था जिनके दौरान सार्क देशों से जुटे जाने-माने प्रतिभागियों ने विभिन्न विधायों में अपनी और अपने क्षेत्र की लेखन कला, समयोचित विषयों पर विचार और साहित्यिक चिंतन साझा किया जिन के बीच प्रतिभागी देशों से आए संगीतकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। उनमें उल्लेखनीय थे मालदीव के इब्राहीम वहीद जो वहाँ के जाने माने लेखक, संगीतकार और टेलिविज़न सेलिब्रिटी हैं, और भारत से वरिष्ठ क्लासिकल नर्तक और नृत्य-निर्देशक, डॉ कृष्ण कुमार।







