गीतिका छंद
इन लबों को गीत दो या, तुम मधुर संगीत दो।
जो हृदय अपने बसा ले, आज ऐसा मीत दो।
भूल कर यादें पुरानी, प्रेम में बस खो सकूँ।
एक कन्धा हो बना, मिलके गले से रो सकूँ।
तोड़ दो सब बन्धनों को, आज नव मधुमास दो।
हो सके तो पूर्ण करना, जो मुझे विश्वास दो।
चाहतो के रंग प्रियतम, देख कितने सुरमई।
आज ये आँचल पुकारे, शाम है ये मधुमयी।
छेड़ मत हालात मेरे, टीस है अब भी भरी।
हो गए है दर्द ताज़ा, चोट है अब भी हरी।
वक़्त बीता है सफर में, मंजिलें आई नहीं।
दौर गुज़रा खोजने में, पर ख़ुशी पाई नहीं।
देख तुझको है यकीं अब, दर्द दौर गुज़र गया।
देख तेरे आगमन से, जन्म आज सँवर गया।
देख मन तू इस कदर क्यों, हो रहा हैरान है।
वो मुकर ना जाय जिनसे, आज तो पहचान है।
प्रेम की भाषा कठिन है, नैन से अब बोलिये।
ये समझता है सभी कुछ, भाव अब ना तौलिये।
साथ चलना साथ रहना, है जरा मुश्किल सफर।
लो करो फिर आज वादा, साथ दोगे हर पहर।
साँस आती साँस जाती, प्रेम के इकरार से।
आयगी अब मौत देखो ,नेह में इंकार से।।
– अनन्या श्री




