सुप्रसिद्ध साहित्यकार दिविक रमेश का कथन (अपनी पुस्तक बाल साहित्य पृष्ठ 41 पर लिखते हैं) है कि-“बाल-साहित्य सबके लिए होता है | केवल बच्चों के लिए नहीं | बाल-साहित्य बड़ों को भी सुसंस्कृत कर सकता है | बाल-साहित्य बच्चों का तो दोस्त होता ही है, बड़ों को भी उनका सच्चा दोस्त बनने की राह दिखाता है |”
बच्चों के लिए लिखना मतलब बच्चा बन जाना | बच्चा बनकर ही बच्चों के लिए लिखा जा सकता है, अन्यथा लिखना व्यर्थ है | जिन्होंने बचपन को खुलकर जिया ही नहीं, उनके लिए मुश्किल है बच्चों के लिए लिखना |
युवा साहित्यकार डॉ.विपिन कुमार द्विवेदी संस्कृत साहित्य के क्षेत्र में एक उभरता हुआ नाम है | संस्कृत के पत्र-पत्रिकाओं उनकी रचनाएँ प्राय: पढ़ने को मिलती रहती हैं | उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी तथा दिल्ली संस्कृत अकादमी द्वारा आप संस्कृत लेखन के लिए कई बार सम्मानित भी हो चुके हैं |
यह रचना विशेष रूप से बालकों के लिए लिखी गई है | इसके लिए डॉ.विपिन द्विवेदी ने गीत की भाषा की ओर विशेष ध्यान दिया है | डॉ.द्विवेदी ने मेघ, पर्वत, नदी, वन, वायु, पृथ्वी, वर्षा, वृक्ष, पशु-पक्षी, कीट कछुआ आदि विषयों अपनी लेखनी चलाई है | इस काव्यसंग्रह में कुल 75 बालगीत हैं |
मेघ: वर्षति मन्दं मन्दम्
झर झर पतति धवलं सलिलम् |
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मधुरं दुग्धं ददाति धेनु:
देहं सर्वं पुष्पाणि धेनु: |
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शनै: शनैः चलति कच्छप:
जले सदा च वसति कच्छप: |
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कृष्ण: कृष्ण: श्वेत: श्वेत:
स्थूल: स्थूल: लगति भल्लूक: |
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वृत्ताकारं भवति मोदकम्
मधुरं मधुरं भवति मोदकम् |
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छुक छुक चलति रेलयानम्
सरणौ सरति रेलयानम् |
इसी प्रकार प्रात:, मार्ग:, गज:, जलम्,जनक:, लूता,शिक्षक:,मातुलगेहम्,रसगोलकम्,नकुल:,शयनम्, होलिका आदि गीत भी अत्यन्त मनोरञ्जक और ज्ञानवर्धक हैं | मित्रवर डॉ.द्विवेदी इसी प्रकार माँ भारती की सेवा करते हैं | मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि उनकी यह कृति संस्कृत बाल साहित्य की श्रीवृद्धि करेगी | पृष्ठ के हिसाब से पुस्तक का मूल्य थोड़ा सा अधिक है|






