कलम उठी,
नारी आकाश छूती
ज्ञान है पंख
आँखों में दीप,
पुस्तक से भविष्य
नारी सशक्त
चुप्पी टूटी है,
शब्द राह दिखाते
शिक्षा की जीत
नए सपने,
खुद को पढ़ी नारी
भाग्य बदला
अक्षर लौ से,
अंधेरा दूर हुआ
नारी है जागी।
ज्ञान खुशबू,
आँचल में भविष्य
शिक्षा की जीत
ज्ञान की सीढ़ी
नारी खूब चढ़ती
छूती गगन
कलम शक्ति,
शब्दों से टूटी बेड़ी
नारी स्वतंत्र
कठिन राह,
उत्तर खोजती है
बुद्धि उजली
पढ़ी है नारी
पीढ़ियाँ रोशन है
देश सशक्त





