माँ भारती
माँ भारती के बच्चे हैं हम ,
करते हैं उनका गुणगान ।
माँ भारती के सपूत हैं हम ,
देंगे कोई भी बलिदान ।।
क्या सुनाऊं इतिहास यहां की ,
जहां जन्म लिए हैं संत महान।
वीरता की गाथाएं यहां की ,
बढ़ाती है इस देश का मान।।
विविधता में एकता का दिखता है ,
यहां पर सुंदर नजारा ।
यहां के हर दिलों में बसता है ,
इस देश का तिरंगा प्यारा ।।
वेदों और शास्त्रों का ज्ञान ,
है विरासत यहां की।
विज्ञान और गणित की धारणाएं ,
है बरकत यहां की ।।
विरासत और विकास का मेल ,
दिखता है यहां अति प्यारा ।
देखने को मिलता है यहां की ,
वादियों में जन्नत का नजारा ।।
करता हूं प्रणाम आज मैं ,
माँ भारती के चरणों में ।
राष्ट्र सेवा और देशभक्ति की,
अभिलाषा लेकर के मन में । ।
************
मानव चेतना
अब कर बुलंद इन बाँहों को,
चल तोड़ दे इन सलाखों को ।
धरती का कर्ज चुकाने को,
अपनी मां का दर्द मिटाने को।
कर न्याय तू खुद से अभी,
वरना जिएगा तू मरते हुए।।
अब कर बुलंद इन बाँहों को,
चल तोड़ दे इन सलाखों को।।
ऐ इंसान तू अपना कर्म कर ,
हंसता हुआ आगे निकल ।
ना रुक तू किसी राह पर ,
ना झुक तू किसी द्वार पर ।।
अब कर बुलंद इन बाँहों को,
चल तोड़ दे इन सलाखों को।।
ईश न्याय पर विश्वास रख,
इक खुद से ही तू आस रख ।
अंत में यही कहता हूं मैं
सत्य पे, तू अड़ा कर
धर्म पे तू चला कर ।।
अब कर बुलंद इन बाँहों को,
चल तोड़ दे इन सलाखों को।।





