आना बादल का मुश्किल है
अब प्यास बुझाना मुश्किल है
इल्ज़ाम लगाना है आसाँ
सच साबित करना मुश्किल है
लहरों से बिना संघर्ष किये
उस पार उतरना मुश्किल है
जब झूठ के वारे न्यारे हों
सच क़ायम रखना मुश्किल है
चाहत ने जहाँ दम तोड़ दिया
फिर दिल का संभलना मुश्किल है
उलझी है ज़माने की गुत्थी
अब उसका सुलझना मुश्किल है
नफ़रत से अगर बख़्शे कोई
अमृत भी निगलना मुश्किल है
शतरंजी खेल है दुनियाँ का
‘देवी’ शह पाना मुश्किल है







