लगभग बारह वर्ष पूर्व मुंबई में हो रहे महासत्संग में श्री श्री रविशंकर जी ने प्रतिदिन “एक मुट्ठी भर दान” के महत्व को बतलाया और इस संदेश से एक व्यक्ति इतना प्रभावित हुआ कि उसने इस कार्य को अपने जीवन पर्यन्त करने का निश्चय कर लिया। कुछ दोस्तों के साथ घर से ही खिचड़ी पकाकर उसको बांटने का कार्य आर्ट ऑफ़ लिविंग से जुड़े श्री अल्पेश पटेल द्वारा शुरु किया गया।समय गुजरता गया, लोग आते और चले जाते किंतु अल्पेश भाई अकेले ही मोर्चे पर डटे रहे और धीरे-धीरे ये कारवां बढ़ता गया। समय के साथ एक नहीं बल्कि पूरे चार वितरण केन्द्र अहमदाबाद शहर में हो गये।वर्तमान में इस अभियान की कोर टीम में लगभग चालीस सदस्य शामिल है जो प्रत्येक केंद्र का संचालन कर रहे हैं। ये केंद्र ऐपलवुड्स बोपल,शनि मंदिर शाही बाग,सोला सिविल अस्पताल एवं दूरदर्शन केंद्र अहमदाबाद में संचालित हैं।
इस अभियान के जरिये उन कामगार मजदूरों को, हाउस कीपिंग स्टाफ, घरेलू कार्य करने वाले सभी लोगों को जिनकी आय निम्नतम होती है, पोषण युक्त दाल-खिचड़ी नाश्ते के समय वितरित की जाती है। कोई विशेष अवसरों पर केला और छास भी दी जाती है। इस अभियान से कोई भी जुड़कर अपनी सेवा दे सकता है.
“एक मुट्ठी चावल”अभियान की अगली कड़ी में शामिल है “करुणालय” (J S Hospital) द्वारा संचालित,जहाँ प्रत्येक शनिवार को कैंसर मरीजों के लिए निशुल्क दूध वितरित किया जाता है। करुणालय की इंचार्ज श्रीमती मीना बेन के अनुसार, “यहाँ उन्हीं मरीजों को भर्ती किया जाता है जिनके पास पर्याप्त पैसे नहीं होते इलाज के लिये या फिर उन्हें अन्य अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती हैं कि घर पर सेवा करें। वे बताती है कि जो रोगी कैंसर की तीसरे और अंतिम स्टेज पर होते है उनको इस यूनिट में रखा जाता है.उनका रहना-खाना, दवाई और साथ ही उनके किसी एक परिवारजन का समस्त खर्चा भी करुणालय ही वहन करता है।”
बातचीत के दौरान लेखक को ज्ञात हुआ कि इस यूनिट में इलाज सिर्फ दवाइयों से नहीं किया जाता बल्कि अल्पेश भाई सभी कैंसर पीड़ितों को घ्यान भी करवाते है।ध्यानमग्न रोगियों को देखकर आपको एक सकारात्मक भाव आता है। जब ओम के उच्चारण के साथ वे आंखें मूँद गहराई में उतरते हैं तब प्रतीत होता है कि वे न तो रोगी है और न ही जीवन के अंतिम पल गिन रहे हैं। हर सप्ताह के ध्यान से वे मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करते हैं। मीना बेन और उनकी पूरी टीम पूर्ण मनोयोग से उनकी सेवा में तत्पर रहती है
साथ ही साथ “एक मुट्ठी चावल” अभियान की टीम (सभी के नाम लेना संभव नहीं है) भी उनकी मदद के लिये तैयार रहती है।
प्रत्येक मनुष्य में नारायण बसते हैं। दान,करुणा,प्रेम,विश्वास आदि हमारी संस्कृति के प्रतीक है। हमारे घरों में पहली रोटी गाय की, दूजी वृद्धजनों की, तीसरी बच्चों और मुखिया की, तत्पश्चात घर की अन्नपूर्णा की और अंतिम रोटी श्वान की होती थी। बातें वही पुरानी हैं,मगर सटीक और तार्किक, तो क्यूँ न हम भी एक मुट्ठी दान का संकल्प लें और जुड़ जाएँ इस अनोखे सेवा अभियान से। साथ ही साथ अपने बच्चों और युवा पीढ़ी को भी इस अभियान का हिस्सा बनाएं।
इस कार्यक्रम के संबंध में अधिक जानकारी के लिये उपरोक्त नंबरों पर आप संपर्क कर सकते हैं।
मीना बेन-9879110762
अक्षत जोशी -9825134481







