मुझे ग़ालिब का यह शेर बहुत पसंद है :
वह बादा-ए-शबाना की सरमस्तियाँ कहाँ
उठिए! बस अब कि लज़्ज़त-ए-ख़्वाब-ए-सहर गई
अल्लामा इक़बाल जब ग़ालिब के मज़ार के दर्शन कर रहे थे तो मजार-ए-ग़ालिब पर एक नौज...
कभी-कभी कोई व्यक्ति किसी युग की भाषा बन जाता है। ऐसा नहीं कि वह सिर्फ़ शब्द गढ़ता है, बल्कि वह लोगों के दिलों में वे भावनाएँ जगाता है जो शायद शब्दों से पहले ही मौजूद थीं। जब भारत 90 के दशक की दहलीज...
“ राष्ट्र धर्म के निर्वहन में - ‘ जय हिंद ... जय हिंदी ... जय भारत ... ’ की व्यावहारिक अनुमोदना का शंखनाद - उत्तिष्ठ भारत: मां भारती पुकारती , के आह्वान में - ‘ सात्विक चेतना के दायित्वबोध द्वारा ज...
लंबे समय से हमारे समाज में, विवाह को एक पवित्र बंधन, सभ्यता की आधारशिला, मूल्यों को पोषित करने और अगली पीढ़ी को हस्तांतरित करने की संस्था माना जाता रहा है। शास्त्र इसकी प्रशंसा से भरे हुए हैं, अनुष...
वैदिक काल में होली पर्व को नवान्रेष्टि यज्ञ कहा जाता था। खेत के अधकचे-अधपके अन्न को होलक या होला कहा जाता है। यज्ञ में हबन करके प्रसाद ग्रहण करने का विधान समाज में था। चूंकि इसमें होला का दहन होता ...
अभी हाल के दिनों में शिक्षक दिवस के अवसर पर एक अजीब सा वीडियो वायरल हो गया। किसी शिशु विद्यालय में शिक्षक दिवस के दौरान आदरणीय राधाकृष्णन की फोटो के सामने छोटी-छोटी बालिकाएं हाल के किसी फिल्म के गा...
एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा,
आँख हैरान है क्या शख्स जमाने से उठा।
- परवीन शाकिर
लोक गीत भारत की सांस्कृतिक संरचना का अभिन्न अंग हैं। ...
गमगीन है बहुत जमाना जिसके लिए
वो शख़्स तो तस्वीर में मुस्करा रहा है
कुछ लोग ज़िन्दगी में बगैर बुलाये अपने आप आ जाते हैं और फिर सारी उम्र कभी पीछा नहीं छोड़ते। स्वयं यदि चले भ...
येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:। / तेन त्वां मनुबध्नामि, रक्षंमाचल माचल ।।
अर्थात-जिस रक्षसूत्र से महान शक्तिशाली दानवेंद्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा से मैं तुम्हे बांधता हूँ जो...
भारतीय समाज में अंतरजातीय विवाह कोई नई बात नहीं है। यह हमेशा से होता आ रहा है और आगे भी होता रहेगा। लेकिन अब इसे लेकर सोशल मीडिया पर जो हाय तौबा मचती है, वह बिल्कुल नया और चौंकाने वाला अनुभव है। सो...




