अप्रैल 2016
अंक - 13 | कुल अंक - 63
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

पाठकीय
सफलतापूर्वक एक वर्ष पूर्ण होने पर ढेरों बधाइयाँ
 
 
इस एक वर्ष में हस्ताक्षर का प्रत्येक अंक मैंने पढा है। हर माह नये अंक के प्रकाशित होने का मैं बेसब्री से इंतजार करती हूँ। वैसे तो प्रत्येक माह की आठ तारीख तक पत्रिका का नया अंक आ ही जाता है लेकिन कभी-कभार अंक देर से भी प्रकाशित होता है। एक बार किसी कारणवश अंक आने में थोड़ी देरी हुई तो मुझे लगा कि कहीं मेरी नजर में न आया हो और मैंने अनमोल जी से निवेदन किया कि आप मुझे हर अंक में टैग कर दिया कीजिये।
मेरी इस उत्सुकता का कारण रही हस्ताक्षर के आवरण पृष्ठ से लेकर प्रत्येक अंक में एक से बढकर एक अच्छी रचनायें। इनमें खास तौर पर गीत, ग़ज़ल, कवितायें एवं कहानियाँ मेरे  मन को हमेशा लुभाती रहीं। जिन्हें जब चाहे, ऑनलाइन पढ लीजिये और पत्रिका साथ में लेकर घूमने का झंझट भी नहीं।
रचनायें भी इतनी अनोखी कि पढ़ते समय कभी महसूस नहीं हुआ कि उनसे मिलती-जुलती रचना कहीं और भी पढ़ी हो, सबसे अलग एवं खास। इसका श्रेय जाता है सम्पादक महोदय को, जो अपना अमूल्य समय देकर रचनाओं का चयन करते हैं और एक खूबसूरत अंक को तैयार करते हैं।
 
प्रत्येक अंक की एक खास बात है कि इसमें 'उभरते स्वर' नाम का एक स्तम्भ होता है, जिसमें हर बार एक नये रचनाकार को स्थान दिया जाता है और यही खासियत है हस्ताक्षर की कि न सिर्फ नये रचनाकार को इसमें स्थान दिया जाता है अपितु उनकी सराहना कर उनका मनोबल भी बढाया जाता है। इस सुखद अनुभूति को  हर नया रचनाकार बखूबी महसूस कर सकता है कि जब उसकी पहली रचना इतनी प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित हो और साथ ही साथ इतनी सराहना भी मिले। यहाँ गौरतलब है कि यदि हर पत्रिका जाने-माने और चर्चित रचनाकार को स्थान देगी तो नये रचनाकार तो स्वयं को कभी स्थापित ही नहीं कर पायेंगे। कुल मिलाकर यहाँ हुनर को पहचान दी जाती है न कि सिर्फ नाम को। कई बार तो ऐसा महसूस होता है, जैसे अनमोल जी ने बीड़ा उठाया है नये रचनाकारों को और भी उम्दा लिखने के लिये प्रेरित करने का। बिल्कुल ऐसी ही ऐसी ही सुखद अनूभूति मुझे भी हुए जब मेरी पहली लघुकथा यहाँ प्रकाशित की गयी। बस तभी से हस्ताक्षर और इनकी पूरी टीम से विशेष लगाव है मुझे। यदि सम्पादक अपने रचनाकारों को मन से सम्मान दे तो यह लगाव होना लाजमी है। 
 
एक बात और कहना चाहूंगी पत्रिका के विषय में। पत्रिका की सदा ही कोशिश रही है कि इसके पाठक अच्छी पठनीय सामग्री से लाभान्वित हो सकें। इसके अलावा भी सम्पादक महोदय ने दो माह पूर्व फरवरी अंक से एक नया स्तम्भ शुरु किया है 'ग़ज़ल की बात', जिसमें जनाब 'खुर्शीद खैराड़ी' ग़ज़ल लिखने की बारीकियों को बड़े ही आसान तरीके से बताते और  सिखाते हैं। गज़ल लेखन सीखने के इच्छुक लोगों के लिये तो यह पत्रिका एक बड़ा खजाना होने के बराबर है अभी कुछ माह पहले ही पत्रिका ने एक नया कदम भी आगे बढाया है। अब तो हम पत्रिका का अंक डाउनलोड भी कर सकते हैं। 
 
बस इसी तरह यह पत्रिका दिनों-दिन आगे बढ़े, तरक्की करे और अंतर्जाल की समस्त पत्रिकाओं में अग्रणी रहे, मेरी ईश्वर से यही प्रार्थना और दुआ है। एक बार फिर से हस्ताक्षर टीम को ढेरों बधाइयाँ एवं आने वाले खूबसूरत अंकों के लिये हार्दिक शुभकामनाएँ।

- रोचिका शर्मा

रचनाकार परिचय
रोचिका शर्मा

पत्रिका में आपका योगदान . . .
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