सितम्बर 2020
अंक - 63 | कुल अंक - 63
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

अच्छा भी होता है
 


हमारे चारों ओर चर्चा होती है कि वे लूट रहे हैं, दूसरों के अधिकार छीन रहे हैं, शोषण ही शोषण हर ओर है परन्तु समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने पुरुषार्थ से अपने सीमित साधनों एवं शक्ति से समाज के उन लोगों की सतत् सेवा निस्वार्थ भाव से करते हैं। आज मैं आपको एक ऐसी ही संस्था की, उसके सतत् प्रयासों की एवं बिना किसी राज्य या केंद्र सरकार की सहायता के कई दशकों से सेवा की कहानी थोड़े से शब्दों में सुनाऊंगी।
 
वर्ष 1979 में जब सारे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस मनाया जा रहा था तब होशियारपुर शहर, पंजाब में, छः व्यक्तियों की एक बैठक हुई जिसमें गहन विचार विमर्श के पश्चात निर्णय हुआ कि ऐसी संस्था का गठन किया जाए जो विद्यार्थीयों के सर्वांगीण विकास हेतु  प्रयास करें। इस संस्था का नाम बाल विकास परिषद रखा गया और यह व्यक्ति इसके पदाधिकारी चुने गए।
1. डॉ बोधराज सैनी ( अध्यक्ष)
2. प्रो. एस एस सूद ( सी. उप प्रधान)
3. डॉ. सुभाष महिता (उप प्रधान)
4. श्री कुलदीप राए गुप्ता ( मुख्य सचिव)
5. श्री मोतीलाल सूद एम. सी.( प्रमुख परामर्श दाता)
6. श्री हरिदेव जी भृगु शास्त्री (कोषाध्यक्ष)
 
अप्रैल 1980 में इस संस्था ने होशियारपुर नगर के सभी विद्यालयों के प्रथम से दशम कक्षा तक प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्याथिर्यों को सम्मानित किया इस के अध्यक्ष स्वामी त्यागानन्द जी एवं मुख्य अतिथि श्री एस. पुरी थे।
इस समारोह से होशियारपुर में इस संस्था का नाम हुआ और यह 1980 से अब तक वर्ष 2020 तक लगातार संस्कृति सामान्य ज्ञान परीक्षा का आयोजन एवं पारितोषिक वितरण समारोह भी करती रही जिसमें विद्यार्थियों को, नकद पुरस्कार, मोमैटो, प्रमाणपत्र आदि देती रही। यह परीक्षा जिला होशियारपुर एवं जालंधर के भिन्न भिन्न स्कूलों में आयोजित करती रही। इस में 2 लाख से अधिक व्यय होता रहा।
1984 वर्ष में भिन्न भिन्न स्कूलों के निर्धन एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को सस्कू यूनिफॉर्म एवं कापियां भी दी जाती रही है। यह भी 2019 तक दी इस में 1200 से 1300 के मध्य तक विद्यार्थियों को लाभ मिलता रहा है।
 
दसवीं व +2 के ऐसे विद्यार्थी जो सरकारी स्कूल या सहायता प्राप्त स्कूलों के होते थे, वह दाखला न होने के कारण परीक्षा नहीं दे सकते थे। उन्हें दाख़िला दे कर उनकी सहायता की जाती है, ताकि वह परीक्षा देकर अपना जीवन बना सकें। संस्था ने विचार किया कि कई ऐसे निर्धन विद्यार्थी होते हैं, उनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं होती। वह स्कूल की पढ़ाई छोड़ देते हैं ऐसे विद्यार्थियों को राशन देने का प्रबंध किया गया। 1985 से यह कार्य आरंभ हुआ । पहले पहले 100 रुपए का राशन एक विद्यार्थी को एक परिवार से अधिक से अधिक दो विद्यार्थी ही लिए जाते थे 2018-19 में 412 विद्यार्थियों को 164800 रुपए का राशन प्रति माह दिया जाता था। अब करोना काल में भी अब तक 210 विद्यार्थियों को 84000 का राशन दिया जा रहा है। 2018-19 में 1392 विद्यार्थियों को ग्रीष्म ऋतु की स्कूल यूनिफॉर्म एवं कापियां प्रति विद्यार्थी के हिसाब से दी गई। 712 विद्यार्थियों को शीत कालीन यूनिफॉर्म (जर्सी, बूट वह जुराबें) दी गई।


 
 
इस संस्था का 50 लाख रुपए का बजट होता है।
इस समय संस्था के 1825 सदस्य हैं, कम से कम 50 रुपए प्रतिमाह मासिक शुल्क है, कुछ लोग 100रु., 200रु., 300रु., 500रु. 1000रु. मासिक भी देते हैं एक सदस्य 2100/- रु.प्रतिमाह भी दे रहा है। 
इस संस्था ने आज तक किसी भी सरकार से किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं ली।
इसके कार्य को कुशलता पूर्वक चलाने के लिए इसके तीन भाग किए हैं।
1. परामर्श दात्री सभा
2. कार्यकारिणी सभा
3. परीक्षा बोर्ड
 
डॉ. बोधराज सैनी 1982 में विदेश चले गए। उसकें पश्चात प्रो. एस.एस. सूद  इस संस्था के 1982 से 2018 तक अध्यक्ष रहे।
डॉ. सुभाष महिता भी 1979 से 2018 तक सीनियर उप- प्रधान रहे।
श्री कुलदीप राए गुप्ता 1979 से 2018 तक मुख्य सचिव रहे।
2018 से डॉ. सुभाष मैहता अध्यक्ष का कार्यभार संभाल रहे हैं।
श्री मदन लाल महाजन सेवा मुक्त एस.डी.ओ. मुख्य सचिव का दायित्व संभाल रहे हैं।
इस संस्था का एक ही उद्देश्य है, बालक की मुस्कान में राष्ट्र की मुस्कान
देश के विद्यार्थियों को समर्पित यह संस्था निरंतर कार्यरत है। इस संस्था के अध्यक्ष एवं मुख्य सचिव जी के नाम दिए जा रहे हैं-
अध्यक्ष                      मुख्य सचिव
डॉ. सुभाष महिता       श्री मदन महाजन
98150-22995         78885-03533
 

- मीनाक्षी मैनन

रचनाकार परिचय
मीनाक्षी मैनन

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