मई 2020
अंक - 60 | कुल अंक - 61
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

जयतु संस्कृतम्
कोरोनासंक्रमणम् 
 
कोरोनाया: संक्रमणं निखिललोके समाक्रामति।
महारोगो न जाने कस्य बन्धोः जीवनं दुष्यति।1।
 
विदेशे व्याधिग्रस्ता ये स्वदेशं प्रति समायान्ति।
महामारीं श्रुत्वा चिन्तिता: हा जीवनं नश्यति।2।
 
विषाणु: चीनदेशाद् प्रसृत: सर्वत्र व्याप्तोsयम्।
निरुपायो दुरासाध्यो जगति जनजीवनं त्रस्यति।
 
निरस्ता रेलयात्राया: टिकट-चारक्षणं गोष्ठी। 
गृहे मार्गे च वायुयाने विधेरनुपालनं रक्षति।4।
 
स्वदेशे घोषित: कर्फ्यू स्वजनताया: रक्षार्थम्।       
असाध्यस्यौपचारार्थं कुशलमनुशासनं वाञ्छति।5।
 
पिशाचो नास्तिक: देश: मनुजमृत्युं वृथा वहते।
विनाशं वैश्विकं दृष्ट्वा सुखदशक्त्या खलो दृप्यति।6। 
 
वैश्विकीमापदं हन्तुं वयं सर्वेऽपि संलग्ना:।
महाकाल: शिव: शम्भु: समस्तं दुष्कृतं कृन्तति।7।
 
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वैश्वकचिन्तनम्
 
वैश्विकं स्वास्थ्यसंवर्धनं कामये।
शान्तिसद्भावसौख्यं सदा कामये।1।
 
हिंसकै: कुत्सितै: दुर्जनै: दुष्कृतम्।
हन्त हर्तुं  सदा मङ्गलं कामये।2।
 
स्वार्थसिद्धिं परित्यज्य लोके जनै:।
पीडितानां हितार्थं शुभं कामये।3।
 
संस्कृते: रक्षणार्थं जनैस्सन्ततम्।
लोकसेवाव्रतं सर्वदा कामये।4।
 
विश्वबन्धुत्वभावं समासाद्य वै।
राष्ट्रभक्तिं जनानामहं कामये।5।
 
वर्णधर्माश्रमा जीवनस्याश्रया:।
सन्तु, सत्यं शिवं सुन्दरं कामये।6।
 
दैवजामापदं विश्वव्याप्तव्यथाम्।
कोरनां नाशितुं साम्प्रतं कामये।7।

- डॉ.राजेन्द्र त्रिपाठी रसराज