अप्रैल 2020
अंक - 59 | कुल अंक - 63
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

व्यंग्य

व्यंग्य- हैप्पी सन्डे
(सभी कामकाजी महिलाओं को समर्पित)


सुना है रविवार का दिन, वीकली (ऑफ) रेस्ट डे होता है। मुझे लगता है मेरे जैसी नौकरीपेशा महिलाओं के लिए यह वीक एन्ड तो होता है पर वैसा वाला नहीं जैसा सब लोग डिस्क्राइब करते हैं। अरे, वो क्या कहते हैं 'सन्डे इज़ ए हॉलिडे"। जब भी व्हाट्सएप पर ऐसे मैसेज आते हैं- एन्जॉय सन्डे, मुझको तो जले पर नमक जैसा लगता है। मन में ख़याल आता है कि जिन महानुभावों को 'खलिहर बइठे-बइठे कौनों काम नहीं होता है तो मैसेज ही चेंपते रहते हैं'। ये लोग जियो को बर्बाद थोड़े न होने देंगे! सबके सब अंबानी के रिश्तेदार जो हैं और मैसेज भेजकर एहसान के साथ उलाहना अलग से सुनाते हैं, "तुम्हें तो कभी फुर्सत ही नहीं मिलती है। कभी-कभी फोन कर लिया करो।" इ तौ एकदमै हद्दे हो गई! अररे! हम भी तो  फुर्सतियाएँ।

एक बार को हम मान भी लें कि हाई सोसायटी वाली महिलाओं के लिए होता होगा 'सन्डे इज़ ए हालीडे' पर कैसे? हम ठहरे मिडिल क्लास सोसायटी से तो इसकी अभी तक हमें कोई जानकारी भी नहीं है और हमारे लिए तो क़तई नहीं है 'सन्डे इज़ ए हाली डे'। हमारे लिए तो बहुतै बड़का वाला स्पेशल वर्किंग डे होता है। सुबह उठने के समय में थोड़ा-बहुत उन्नीस-बीस तो हो सकता है, जैसे पाँच का साढ़े पाँच, बस्स....  पर इससे ज़्यादा नहीं। उसके बाद तो नान स्टाप वर्किंग-डे होता है। घर के काम करते-करते हाँफने लगते हैं, जीभ बाहर आ जाती है और साथ में आँखें भी........उफ़्फ़!!!
बस प्राण नहीं निकलते हैं। अब क्या कहें? हमारा हाली डे तो सचमुच काली डे हो जाता है और पहला स्नान तो स्वेट स्नान होता है।


आप जानना नहीं चाहेंगे क्यों? उस डे की शुरुआत एक दिन पहले शनिवार से ही शुरू हो जाती है और आने वाले संडे की बुकिंग तो पिछले संडे से ही शुरू हो जाती है। किसी को आना है तो भई काहे नहीं, मोस्ट वेलकम है क्योंकि कल तो सन्डे है। हम तो एकदम्मे खाली बैठे हैं, कौनों प्राब्लम नाहीं है। कहीं जाना है तो भी कौनों टेन्शन वाली बात नाहीं, अरे भई क्योंकि कल सन्डे है। अब सुबह का नाश्ता तो कुछ स्पेशल ही होना है साथ में दोपहर का खाना भी, क्योंकि कल सन्डे है। इसके अलावा इस सन्डे पर साप्ताहिक सफाई घर की, कपड़ों की, शापिंग और न जाने कितने आकस्मिक अटैक सन्डे के आने से पहले ही होते रहते हैं। हमें लगता है कि सभी वर्किंग वुमेन को सन्डे के लिए एक छोटा-सा आक्सीजन सिलेंडर घर में ही रखना चाहिए और एम्बुलेंस नम्बर मोबाइल काल लाग में सबसे ऊपर ही रख लेना चाहिए। जैसे कोई इमरजेंसी होने पर वक़्त ज़रूरत पर काम आए, न जाने कब सन्डे को नन्हा-सा मुट्ठी भर का दिल पहाड़ जैसे सन्डे के लिए अपने आपको असमर्थ घोषित कर, पम्प करना ही बन्द कर दे और कह दे लो, आज तो मैं असली वाला रेस्ट करूँगा। बस उसी दिन ही हो जाएगा तुम्हारा फाइनल सन्डे। हमारा तो सच्ची कहें, भगवान कसम...बिलकुल बस ही नहीं चलता वर्ना हम इस सन्डे को तो ब्लैक डे ही घोषित कर दें।

एक बात कहनी है, किसी ने हमसे 'हैप्पी सन्डे' कह दिया था, हमारा जी भर आया। हमसे रहा नहीं गया सो हमने अपनी सारी भड़ास निकाल दी। आप लोग माफ़ कीजिएगा पर हम उसको नहीं छोड़ेंगे। एक बात और हमसे कभी भी हैप्पी सन्डे भूलकर भी मत कहियेगा।


- अना इलाहाबादी

रचनाकार परिचय
अना इलाहाबादी

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