अप्रैल 2020
अंक - 59 | कुल अंक - 63
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

जयतु संस्कृतम्
चीनेsभवज्जनिरहो नगरे वुहाने
तस्माद्बहिश्च गतवान्खलु नो विषाणु:।
भूमौ परं प्रसरितं वदतीह चित्तं
शस्त्रञ्च जैविकमिदं ह्यथवा विषाणु:।।1।।
 
                   युद्धं तृतीयमिदमस्ति च येन विश्वं
                   त्रस्तं सुपीडितमहो गृहवासलग्नम्।
                   जातञ्जनप्रमरणं वदतीह चित्तं
                   शस्त्रञ्च जैविकमिदं ह्यथवा विषाणु:।।2।।
 
देशद्वयस्य रिपुताफलमत्र भुङ्क्ते
सर्वञ्जगत्प्रियमिदं ननु दोषमुक्तम्।
श्लाघ्यन्न कार्यमखिलं वदतीह चित्तं
शस्त्रञ्च जैविकमिदं ह्यथवा विषाणु:।।3।।
 
                  सम्भूय सर्वमनुजैर्ननु दण्डनीय:
                  कृत्यं कृतञ्च स जनो ननु येन दुष्टम्।
                  ध्वस्तीकृतञ्जगदिदं वदतीह चित्तं
                  शस्त्रञ्च जैविकमिदं ह्यथवा विषाणु:।।4।।
 
जातस्सखे! च मनुजो बहु राक्षसोsद्य
दुष्टोsभिमाननिरत: खलपापदक्ष:।
नीचप्रधूर्तदनुजो वदतीह चित्तं
शस्त्रञ्च जैविकमिदं ह्यथवा विषाणु:।।05।।
 
                कश्चिच्छृगालनिकारो नहि पारयेत्स:
                व्याघ्रेण सार्द्धमिह युद्धमहो प्रकर्तुम्।
                तस्मात्क्षलं प्रकुरुते वदतीह चित्तं
                शस्त्रञ्च जैविकमिदं ह्यथवा विषाणु:।।06।।
 
लघ्वी च नास्ति घटनेयमहो जगत्यां
सच्चिन्तनीयमधुनैव समस्तदेशै:।
निर्मीयतां प्रनियमो वदतीह चित्तं
शस्त्रञ्च जैविकमिदं ह्यथवा विषाणु:।।07।।
 
                अग्रे भवेन्न घटना शशिकान्तवार्ता
                सच्छ्रूयतां स्वमनसा मम मित्रवर्यै:।
                संरक्ष्यतां जगदिदं वदतीह चित्तं
                शस्त्रञ्च जैविकमिदं ह्यथवा विषाणु:।।08।।
 
चिन्त्यतां चिन्त्यतां सर्वैरेकदा हृदयेन सा।
वार्ता सम्प्रोच्यते मित्र! शशिकान्तेन या मया।।

- डॉ. शशिकान्त शास्त्री