अप्रैल 2020
अंक - 59 | कुल अंक - 61
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ग़ज़ल-गाँव

ग़ज़ल-

ये  बहाना   वो  बहाना
आपका अक्सर न आना

आप जिसमें कुछ नहीं हैं
वो फ़साना  क्या सुनाना

बस मुझे महसूस  करके
क्या लगा मुझको बताना

याद क्यों अक्सर रहा जो
चाहता  हूँ  भूल   जाना

खा चुका  हूँ  आपसे जो
आप वो धोखा  न खाना


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ग़ज़ल-

ख़र्च  कबके  हो  चुके  हो
और फिर भी बच गये  हो

ख़ुद कभी के  मर चुके  हो
सिर्फ़  मुझमें  जी  रहे  हो

ज़िन्दगी भर चुप  रहे  हो
अब नहीं हो,  बोलते   हो

ये  रही  मंज़िल  तुम्हारी
रास्ते  में क्यों  रुके  हो

आप मेरे  क्या  बनेंगे
क्या  कभी ख़ुद के हुए  हो


- विज्ञान व्रत

रचनाकार परिचय
विज्ञान व्रत

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ग़ज़ल-गाँव (2)