फरवरी 2020
अंक - 57 | कुल अंक - 58
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

अच्छा भी होता है
सर्वधर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन
 
 
सुनते आए थे कि शादी-ब्याह तो दो दिलों का मेल है- लेकिन यह सैकड़ों दिलों के सुमेल का एक ऐसा अनूठा संगम भी हो सकता है, जिसमें ईश्वर, अल्लाह, येशु भी सम्मिलित हो यह पहली बार पता चला। मंदिर, मस्जिद और चर्च को एक ही मंडप में साक्षी बनाकर 53 जोड़े जीवन के मधुर बंधन में बंध रहे थे; और उनके परिजन, दोस्त, रिश्तेदार यूँ महसूस कर रहे थे जैसे वे सब किसी बहुत बड़े आयोजन के कर्ता-धर्ता भी थे, मेहमान भी और मेजबान भी। क्या ही अद्भुत दृश्य सजा होगा सच में- 14 नवंबर 2019 को किशनगढ़, अजमेर, राजस्थान में।
 
इस मनोरम आयोजन की खूबसूरती को मैंने महसूस किया ‘संपर्क संस्थान’ संस्था के मित्रों द्वारा शेयर की गई तस्वीरों में, बातों में और ऐसे अनूठे आयोजन में शामिल हो सकने की उनकी खुशी में। बधाई के पात्र हैं ‘सर्वधर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन’ के आयोजक जिनके दिलों में प्रेम है, सद्भावना है, समर्पण है किसी के सपने को पूरा करने का अदम में जोश है। लगन है इनके दिलों में समाज को एक सूत्र में पिरोने की, प्रयासरत है ये लोग जाति, धर्म, आर्थिक और सामाजिक असमानता जैसी दीवारों से बढ़ते हुए समाज को ऐसा उपयुक्त मंच प्रदान कर एकता में बांधने को।
 
अपने एक दोस्त से बात करते हुए मुझे पता चला कि गत वर्ष नवंबर में करवाए गए इस आयोजन में एक दिव्यांग जोड़ा भी था। कैसे उल्लास और कृतज्ञता के अश्रु झड़ रहे थे अभिभावकों की आंखों से, जिन्होंने यह स्वप्न भी न लिया होगा कि बेटी की विदाई कर भी पाएंगे वे कभी। संपर्क के समाजसेवी, संवेदनशील बुद्धिजीवियों ने, न केवल उन माता-पिता का स्वप्न ही साकार किया अपितु ऐसा स्नेह, ऐसी आवभगत, ऐसा अपनापन दिया जो उनके दिलों में चिरस्थाई छाप छोड़ेगा। साधुवाद है ऐसे लोगों को। यहाँ मैं यह भी बता दूं कि अब तक ‘सर्वधर्म सामूहिक विवाह सम्मेलन’ के तहत पाली, जोधपुर, सिरोही, ब्यावर और अब किशनगढ़ सहित 14 शहरों में पंद्रह सौ  से भी ज्यादा शादियां करा चुका है संपर्क संस्थान, जिन में समस्त स्त्री धन के अलावा सभी जोड़ों को 50-50 गज के प्लॉट भी दिए गए हैं।
 
एक बड़ा प्यारा शब्द सुनने में आया एक तस्वीर को देख कर जिसमें नवविवाहित जोड़े को बिठाया गया था- “बिंदौरी”; यकीन जानिए इस तस्वीर को देखकर मेरे मन में ऐसे भाव है कि फूलों से लदी गाड़ी में बिठाया हुए प्यारे से नवविवाहित जोड़े के साथ, वहां मौजूद आयोजकों, मेहमानों, और अभिभावकों की दुआएं तो चल ही रही थी, लेकिन उस काफिले में शामिल थी वेद की ऋचाएं, कुरान की आयतें और बाइबिल में लिखी ईश्वर की बातें। पुष्प वर्षा कर रहे थे। ‘बिंदोरी’ के समय आकाश से देवी-देवता, हर्षित हो रहे होंगे वह भी यह सोच कर ही कि आज यहां कुछ तत्व देश को धर्म, जाति और अमीरी, गरीबी के नाम पर बांट रहे हैं- वहीं कुछ ऐसे नायाब दिलों वाले मानवता के पुजारी भी हैं जो पंडित, मुल्ला और पादरी को एक ही मंच पर एक साथ बिठा रहे हैं।
अनेकों-अनेक शुभकामनाएं उन नवविवाहित जोड़ों के लिए और हर उस व्यक्ति के लिए जिसने परोक्ष या अपरोक्ष रूप से इस पावन यज्ञ में अपने योगदान की आहुति डाली।
 
संपर्क संस्थान जिसका गठन 15 अगस्त 2001 को प्रेस क्लब अध्यक्ष श्री अनिल लडावा उनके 11 साथियों ने मिलकर किया, आज 500 से अधिक सदस्य हर क्षेत्र में जुड़े हुए हैं। ‘संपर्क’ के अध्यक्ष श्री अनिल लडावा (9829070605), महासचिव श्री विमल चौहान, सचिव श्री सुनील अग्रवाल समन्वयक सुश्री रेनू शर्मा और संरक्षक श्री प्रदीप अग्रवाल।

- मीनाक्षी मैनन

रचनाकार परिचय
मीनाक्षी मैनन

पत्रिका में आपका योगदान . . .
कविता-कानन (1)विशेष (1)'अच्छा' भी होता है! (3)