फरवरी 2020
अंक - 57 | कुल अंक - 58
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

उभरते स्वर
ज़िन्दग़ी
 
1. 
 
ज़िन्दग़ी के मायने
ज़िन्दग़ी खुद समझाती है
हर मोड़ पर अपने
नए रंग दिखलाती है
कभी बस में लोगों की
घूरती नजरों में
हिम्मत से चलने का
अहसास कराती है
तो कभी अंधेरी सड़क
पर बहादुर बनाती है
 
********************
 
2. 
 
ज़िन्दग़ी के मायने तो
वो माँ भी सिखाती है
जिसकी पूरी ज़िन्दग़ी
बच्चों के इर्द गिर्द
घूमती जाती है
जिसकी रक्षा के लिए वो
सबसे लड़ जाती है
जरूरत पड़ने पर वो
अपना सिंदूर भी मिटाती है
फिर भी काग़ज़ के टुकड़ों में 
अपना नाम नहीं पाती है

- श्रुति

रचनाकार परिचय
श्रुति

पत्रिका में आपका योगदान . . .
उभरते स्वर (1)