प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अगस्त 2017
अंक -44

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

गीतम्
संस्कृते संस्कृति:
 
संस्कृते संस्कृति: सेवनीया सदा। 
भाति कीर्ति: शुभा भारतीया सदा।1।
 
विश्वबन्धुत्वभावोऽस्ति वेदेषु भो!
भारते भावना वर्धनीया सदा।2।
 
रामभक्तिं समाराध्य रामायणे।
रामराज्यप्रथा पूजनीया सदा।3।
 
ज्ञानगीतामृतं पीयते भारते।
कृष्णरीति: मुदा राधनीया सदा।4।
 
मानवीयापरीक्षा महाभारते।
पाण्डवै: जीवने रक्षणीया सदा।5।
 
प्राप्य सौख्यं च शान्तिं जनै: जीवने।
सर्वशुभकामना प्रार्थनीया सदा।6।
 
ध्यानधैर्यं च योग: गुरोश्चादर:।
लोकहितभावना धारणीया सदा।7।
 
स्वालये सङ्गमे मन्दिरे चापणे ।
भारते स्वच्छता पालनीया सदा।8।
 
धर्मभाषावच: खानपानादय:।
मानवै: जीवने साधनीया सदा।9 ।
 
गीयते राष्ट्रगीतिर्न किं भारते ।
मातृभू: सादरं वन्दनीया सदा।10।

- डॉ.राजेन्द्र त्रिपाठी रसराज
 
रचनाकार परिचय
डॉ.राजेन्द्र त्रिपाठी रसराज

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जयतु संस्कृतम् (3)