प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
जुलाई 2017
अंक -32

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

देशावर

कुछ बचा है हमारे बीच


सब कुछ ख़त्म नहीं हो गया है
कुछ न कुछ बचा है हमारे बीच

बचे हैं साझे की कुछ स्मृतियाँ
जो हमें मिला है, अपने जीवन की निधि से ब्याज सरीखा

बची है ज़रा-सी आशा
जो हमें चुक जाने पर भी, रिक्त नहीं होने देगी उम्रभर

बची है ज़रा-सी प्रार्थना
जो हमारे न होने पर भी होगी तारों की तरह

नहीं, सब कुछ ख़त्म नहीं हो गया है
अभी कुछ न कुछ बचा है हमारे बीच।


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यह जीवन

ये अनजानी राहें
कुछ ढूँढता हुआ मन
कुछ पाने की ललक
कभी कुछ खो देने का डर

अनवरत
मंज़िल की तलाश पर
पर अक्सर अनियंत्रित-सा
यह जीवन।


- कमलेश यादव
 
रचनाकार परिचय
कमलेश यादव

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देशावर (1)